
मुंबई। मुंबई विश्वविद्यालय देश में आधुनिक शिक्षा की नींव रखने वाला अग्रणी विश्वविद्यालय रहा है, जहाँ न्यायमूर्ति रानडे, लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और स्वातंत्र्यवीर सावरकर जैसी महान विभूतियों ने शिक्षा प्राप्त की। उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए आज के नवस्नातकों को देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 सक्षम, सृजनशील और ज्ञानसमृद्ध भारत के निर्माण की मजबूत आधारशिला है, जो छात्रों को नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के लिए प्रेरित करेगी। यह विचार उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने व्यक्त किए। वे मुंबई विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे, जिसका आयोजन फोर्ट स्थित सर कावसजी जहांगीर दीक्षांत सभागृह में किया गया। समारोह में केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अजय कुमार सूद प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रा. (डॉ.) रविंद्र कुलकर्णी, प्र-कुलगुरु डॉ. अजय भामरे, कुलसचिव डॉ. प्रसाद कारंडे, परीक्षा एवं मूल्यांकन मंडल की निदेशक डॉ. पूजा रौंदळे सहित अधिसभा, प्रबंधन परिषद, विद्यापरिषद के सदस्य, विभिन्न विद्याशाखाओं के अधिष्ठाता, प्राचार्य, विभागप्रमुख एवं प्राध्यापक उपस्थित थे। चंद्रकांत पाटील ने कहा कि 21वीं सदी में ज्ञान, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन हो रहा है, ऐसे में छात्रों को “कैसे सीखना है” इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा अधिक अनुभवात्मक, समावेशी और आनंददायी बनेगी, जिसमें विज्ञान के साथ कला, क्रीड़ा, संस्कृति और मूल्य शिक्षा का समन्वय होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था का केंद्र हैं, इसलिए उन्हें सशक्त करना और श्रेष्ठ प्रतिभाओं को शिक्षा क्षेत्र की ओर आकर्षित करना समय की आवश्यकता है। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार सूद ने कहा कि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर परिवर्तन के वाहक बन रहे हैं और कुतूहल, सर्जनशीलता तथा नवाचार पर आधारित शिक्षा ही देश की प्रगति का आधार बनेगी। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में कुतूहल-केंद्रित अध्यापन, संकल्पनात्मक समझ और प्रयोग आधारित सीखने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. सूद ने ‘एस-लाइफ फ्रेमवर्क’ के माध्यम से विज्ञान को दैनिक जीवन से जोड़ने, प्रयोगशालाओं के पुनरुद्धार, अनुसंधान को पाठ्यक्रम से जोड़ने और युवाओं की डिजिटल भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने भारत सरकार की ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ पहल और एआई आधारित DPI 2.0 को शोध, स्वास्थ्य, कृषि और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। समारोह में कुलगुरु प्रा. (डॉ.) रविंद्र कुलकर्णी ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस वर्ष विभिन्न विद्याशाखाओं के कुल 1 लाख 72 हजार 522 स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 84 हजार 318 छात्र और 88 हजार 202 छात्राएं शामिल हैं। साथ ही 602 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जबकि विभिन्न परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 19 छात्रों को 21 स्वर्ण पदक तथा दो विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि दीक्षांत के पश्चात विद्यार्थियों के डिग्री प्रमाणपत्र, अंकपत्र और क्रेडिट विवरण डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।




