
मुंबई। नवंबर माह की शुरुआत में हुई वर्षा के कारण सिंधुदुर्ग जिले में आम के पेड़ों पर बौर (मोहोर) आने में देरी हुई। इसके बाद दिसंबर से जिले में लगातार कम तापमान और ठंडे वातावरण के चलते पेड़ों पर अच्छा बौर आया। वर्तमान में तीसरा बौर आने के बाद इससे आम उत्पादक किसानों को कितना उत्पादन मिलेगा, इसको लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस संबंध में कृषि विभाग को विस्तृत और सटीक रिपोर्ट तैयार कर तत्काल शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश मत्स्य व्यवसाय, बंदरगाह तथा सिंधुदुर्ग जिले के पालक मंत्री नितेश राणे ने दिए हैं। सिंधुदुर्ग जिले में आम की फसलों पर रोग के कारण हुए नुकसान के संदर्भ में मंत्रालय में पालक मंत्री राणे की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। शुक्रवार को हुई बैठक में सिंधुदुर्ग की जिलाधिकारी तृप्ति धोडमिसे, डॉ. बाळासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ के कुलपति संजय भावे, फलोत्पादन निदेशक अंकुश माने, अनुसंधान निदेशक डॉ. वी.यू. शहारे, वनस्पति रोग विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. पुष्पा पाटील, कीट विज्ञान विभाग प्रमुख डॉ. विजय देसाई, कृषि विभाग के अवर सचिव डॉ. ललितकुमार धायगुडे सहित आम एवं अन्य फल बागायतदार संघों के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि कोंकण क्षेत्र में यदि आम पर अपेक्षित बौर नहीं आता है तो उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही आगामी दिनों में यदि वर्षा होती है या तापमान में अत्यधिक वृद्धि होती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस परिस्थिति को प्राकृतिक आपदा घोषित कर कोंकण के आम बागायतदारों को शासन द्वारा व्यापक आर्थिक सहायता दी जाएगी, ऐसा विश्वास मंत्री राणे ने व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि आम की फसल पर विभिन्न कीटनाशकों के अत्यधिक छिड़काव से उत्पादन में गिरावट देखी जा रही है, इसलिए इस विषय पर ठोस नीति तैयार करने की आवश्यकता है। कृषि विश्वविद्यालयों को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया जाएगा। साथ ही कोंकण में आम उत्पादन बढ़ाने के लिए विदेशी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लेने पर भी सकारात्मक विचार किया जाएगा।




