
मुंबई। दिवाली को केवल रोशनी, पटाखे और सजावट का त्योहार न मानकर, मानवता, प्रेम और एकता का प्रतीक मानते हुए महाराष्ट्र की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने शनिवार को एक अनोखे और हृदयस्पर्शी कार्यक्रम में अनाथ बच्चों के साथ दिवाली मनाई। बच्चों के चेहरों पर खुशी देखकर मंत्री मुंडे भावुक हो उठीं। यह विशेष कार्यक्रम केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय और द चिल्ड्रन्स एड सोसाइटी फॉर अंडरप्रिविलेज्ड किड्स ऑर्फनेज* द्वारा राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, मुंबई में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर संग्रहालय की निदेशक निधि चौधरी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए पंकजा मुंडे ने कहा- यह मायने नहीं रखता कि ये बच्चे किस जाति या धर्म से हैं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि वे भी इंसान हैं। उनकी आँखों में जो खुशी और उम्मीद झलकती है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। हमें ऐसा समाज बनाना होगा, जहाँ हर व्यक्ति अपनी पहचान स्वयं बना सके। उन्होंने आगे कहा कि पर्यावरण विभाग ने सोशल मीडिया के माध्यम से ‘प्रदूषण मुक्त दिवाली’ के लिए जागरूकता अभियान चलाया है। मुंडे ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचते हुए प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करें और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से त्योहार मनाएँ। इस अवसर पर मंत्री मुंडे ने बच्चों के साथ आकाश कंदील बनाए, दीयों पर रंग भरे और चित्रकला गतिविधियों में भाग लिया। साथ ही उन्होंने आकाश कंदील बनाने की कार्यशाला और प्रसिद्ध कलाकार ए. ए. अलमेलकर की कलाकृतियों की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह भावनात्मक और प्रेरणादायी रहा— जहाँ बच्चों की मुस्कान, कला की रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता ने इस दिवाली को सच्चे अर्थों में ‘प्रकाश पर्व’ बना दिया।




