
मुंबई। राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले धनगर समाज के पारंपरिक व्यवसाय को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार ने पहल तेज कर दी है। मंगलवार को कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने अर्धबंधिस्त भेड़पालन परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। मंत्रालय में ‘नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी (पोकरा)’ योजना के अंतर्गत इस परियोजना को शामिल करने को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभाग के प्रधान सचिव विकासचंद्र रस्तोगी, उपसचिव अंबादास चंदनशिवे, पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र मेंढी व शेळी विकास महामंडल के प्रबंध निदेशक डॉ. शितलकुमार मुकणे, संतोष महात्मे तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री भरणे ने कहा कि अर्धबंधिस्त भेड़पालन से भेड़ों की बेहतर देखभाल संभव होगी, मृत्यु दर में कमी आएगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, जिससे धनगर समाज आर्थिक रूप से सशक्त होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि लाभार्थियों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बैठक में बताया गया कि पारंपरिक रूप से भेड़पालन करने वाले इस समुदाय को वन क्षेत्रों पर निर्भरता, बढ़ते शहरीकरण और चराई भूमि में कमी के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चारे की कमी के चलते उन्हें वर्षभर भटकना पड़ता है, जिससे विशेषकर बरसात के मौसम में भेड़ों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर असर पड़ता है। इसके अलावा भटकंती के दौरान वन, राजस्व और पुलिस विभागों के साथ टकराव की घटनाएं भी सामने आती हैं, जिससे आर्थिक नुकसान और कभी-कभी जनहानि भी होती है। लगातार भटकंती के कारण यह समाज शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रह जाता है। मंत्री भरणे ने कहा कि इस समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और अर्धबंधिस्त भेड़पालन परियोजना उनके लिए स्थिर और टिकाऊ आय का साधन बन सकती है। इसके लिए प्रारंभिक तौर पर तीन जिलों का चयन कर कृषि और पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। परियोजना के तहत भेड़पालकों के समूह या किसान उत्पादक कंपनियां (एफपीओ) गठित करने, उन्हें स्थायी या किराये की जमीन उपलब्ध कराने, साथ ही शेड, सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं देने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा भेड़ों की बिक्री में पारदर्शिता लाने के लिए प्रभावी मार्केटिंग व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, बीमा सुविधा और प्रत्येक जिले में कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक विचार किया गया। सरकार द्वारा चराई के लिए वन या अन्य सरकारी खाली जमीन नियोजित तरीके से उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे धनगर समाज के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके।




