
लखनऊ, उत्तर प्रदेश। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयान के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 15 जनवरी को अपने जन्मदिन के मौके पर दिए गए इस बयान ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासी बहस छेड़ दी है। भाजपा, जदयू और कांग्रेस के नेताओं ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देते हुए सामाजिक समरसता, राजनीतिक भ्रम और नेतृत्व की दिशा पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने मायावती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत एक खूबसूरत गुलदस्ते की तरह है, जिसमें हर रंग और हर तरह के फूल होते हैं। उन्होंने कहा- किसी एक जाति की बात करने के बजाय समाज के पूरे ताने-बाने को साथ लेकर चलने की जरूरत है। जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं—‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास। अगर किसी एक जाति को लेकर टिप्पणी की जाएगी तो दूसरे वर्ग भी सवाल उठाएंगे कि क्या उनका कोई रोल नहीं है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि ब्राह्मण समाज ने हमेशा समाज के कल्याण के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि यह समाज एकता और साथ आगे बढ़ने में विश्वास रखता है और ऐतिहासिक रूप से समाज को जोड़ने की भूमिका निभाता रहा है। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज को लेकर बसपा से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज अपने विवेक से निर्णय लेने में सक्षम है और किसी के बहकावे में नहीं आता। जदयू नेता केसी त्यागी ने अपेक्षाकृत संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मायावती को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे उनके साथ संसद में काम कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मायावती ने समय के साथ समाज के कई वर्गों को अपने से दूर कर लिया है, यहां तक कि अपने ही समुदाय को भी।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी मायावती को जन्मदिन की बधाई दी, लेकिन उनकी राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा- उनकी राजनीतिक विचारधारा अभी स्पष्ट नहीं है। जब तक वह इस भ्रम से बाहर नहीं आतीं, तब तक उनके सत्ता में आने का सवाल ही नहीं उठता। अनवर ने मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान को भी इसी राजनीतिक असमंजस से जोड़कर देखा। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उन्होंने मायावती का बयान नहीं देखा है। उन्होंने केवल उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और दीर्घायु होने की कामना की। गौरतलब है कि मायावती ने अपने बयान में कहा था कि ब्राह्मण समाज को भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बहकावे में नहीं आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि केवल “बांटी-चोखा” जैसे प्रतीकों से ब्राह्मण समाज को बहलाया नहीं जा सकता। इसी बयान को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया है।




