
ठाणे। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। ठाणे जिले के अंबरनाथ में कांग्रेस द्वारा निलंबित किए गए 12 नवनिर्वाचित पार्षदों ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने न केवल अंबरनाथ नगर परिषद के सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है, बल्कि महायुति की मजबूती और कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। भाजपा में शामिल होने वाले पार्षदों में प्रदीप नाना पाटील, दर्शना उमेश पाटील, अर्चना चरण पाटील, हर्षदा पंकज पाटील, तेजस्विनी मिलिंद पाटील, विपुल प्रदीप पाटील, मनीष म्हात्रे, धनलक्ष्मी जयशंकर, संजवणी राहुल देवडे, दिनेश गायकवाड, किरण बद्रीनाथ राठोड और कबीर नरेश गायकवाड शामिल हैं। इन सभी पार्षदों ने कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा में प्रवेश किया है, जिसे स्थानीय राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम की औपचारिक घोषणा भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने बुधवार देर रात पार्टी कार्यालय में की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सत्ता की लालसा से प्रेरित नहीं है, बल्कि विकास और सुशासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता का परिणाम है। चव्हाण ने कहा कि जनता ने इन पार्षदों को विकास के उद्देश्य से चुना है और भाजपा नीत सरकार की कार्यशैली, तेज निर्णय क्षमता और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण से प्रभावित होकर उन्होंने यह कदम उठाया है। गौरतलब है कि 20 दिसंबर को हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनावों में खंडित जनादेश सामने आया था। 60 सदस्यीय नगर परिषद में शिवसेना (शिंदे गुट) 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के आंकड़े से चार सीटें पीछे रह गई। भाजपा को 14, कांग्रेस को 12 और अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 4 सीटें मिली थीं, जबकि 2 निर्दलीय पार्षद भी चुने गए थे। चुनाव परिणामों के बाद भाजपा ने कांग्रेस और राकांपा के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी (एवीए)’ का गठन किया था। इस गठबंधन को एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन भी मिला, जिससे गठबंधन की संख्या 32 तक पहुंच गई और नगर परिषद में बहुमत सुनिश्चित हो गया। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने भाजपा के साथ इस गठबंधन को पार्टी लाइन के खिलाफ मानते हुए अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया था। कांग्रेस की इस सख्त कार्रवाई के तुरंत बाद इन पार्षदों का भाजपा में शामिल होना राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रहा है। इसे कांग्रेस के अंदरूनी असंतोष और नेतृत्व संकट से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, भाजपा इसे राज्य में महायुति सरकार और उसके विकास मॉडल पर बढ़ते भरोसे के रूप में पेश कर रही है। अब 12 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन और अधिक मजबूत हो गया है। दूसरी ओर, बहुमत के करीब पहुंचकर भी सत्ता से बाहर रह गई शिवसेना के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अंबरनाथ की यह सियासी तस्वीर आने वाले समय में महाराष्ट्र की नगर राजनीति पर गहरा असर डाल सकती है।




