
मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते वैश्विक एलपीजी संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में किसी भी उद्योग या नागरिक को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बुधवार को राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि राज्य में कार्यरत हर विदेशी कंपनी को भी राज्य का ही हिस्सा मानते हुए सरकार उनकी जरूरतों का पूरा ध्यान रख रही है। पुणे में विदेशी निवेश वाले उद्योगों को एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सह्याद्री अतिथि गृह में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें स्वीडन, जापान और दक्षिण कोरिया के महावाणिज्य दूतों ने भाग लिया। बैठक में स्वेन ऑस्टबर्ग, कोजी यागी और डोंगवान यू सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री रावल ने बताया कि वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान और शिपिंग लागत में वृद्धि के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार मिलकर हालात पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर तीन चरणों में बांटा है। पहले चरण में अस्पताल, शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं को, दूसरे चरण में रेस्टोरेंट और खाद्य उद्योगों को, जबकि तीसरे चरण में श्रमिक-प्रधान उद्योगों को गैस आपूर्ति की जा रही है। एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए हर जिले में कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर शुरू किए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाए और कृत्रिम कमी या कीमतों में हेरफेर करने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएं। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी भी विदेशी कंपनी ने गैस आपूर्ति को लेकर कोई शिकायत नहीं की है। साथ ही पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) नेटवर्क के विस्तार पर भी तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे भविष्य में एलपीजी पर निर्भरता कम होगी। बैठक में विदेशी प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार की पारदर्शी और सकारात्मक नीति की सराहना की और कहा कि संकट के समय केंद्र और राज्य का समन्वय सराहनीय है। मंत्री रावल ने भरोसा जताया कि यह संकट अस्थायी है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। उन्होंने उद्योगों और नागरिकों से सहयोग बनाए रखने की अपील भी की।




