
मुंबई। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और उसके चार निदेशकों के खिलाफ इंडियन बैंक (पूर्व में ई-इलाहाबाद बैंक) को 12.72 करोड़ रुपये का चूना लगाने के आरोप में जांच शुरू की है। आरोप है कि कंपनी ने गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज़ और मंजूर क्रेडिट सुविधाओं के तहत प्राप्त फंड का दुरुपयोग कर बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया। सीबीआई के अनुसार, यह मामला इंडियन बैंक, स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच, मुंबई के डिप्टी जनरल मैनेजर नरेश चंद्र नेहरा की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कॉस्मेटिक उत्पादों की थोक ट्रेडिंग करने वाली कर्ज लेने वाली कंपनी और उसके चार निदेशकों ने अज्ञात बैंक अधिकारियों व निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और 15 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा का धोखाधड़ी से लाभ उठाया। जांच एजेंसी का कहना है कि वर्ष 2011 से 2018 के बीच आरोपियों ने बैंक को गुमराह करने के उद्देश्य से झूठे दस्तावेज़ और फर्जी स्टॉक स्टेटमेंट जमा किए। आरोप है कि मंजूर किए गए फंड को उन उद्देश्यों के बजाय अन्य कार्यों में लगाया गया, जिनके लिए लोन स्वीकृत किया गया था। इस फंड डायवर्जन के कारण बैंक को 12.72 करोड़ रुपये का गलत वित्तीय नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों को उतना ही अवैध लाभ मिला। सीबीआई के मुताबिक, कर्ज लेने वाली कंपनी लोन की किश्तें और ब्याज चुकाने में विफल रही, जिसके चलते जून 2018 में उसका खाता एनपीए (एनपीए ) घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंक ने जून 2020 में इस खाते को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) को धोखाधड़ी के मामले के रूप में रिपोर्ट किया। इस मामले में सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (कीमती सिक्योरिटी आदि की जालसाज़ी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाज़ी) और 471 (जाली दस्तावेज़ को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत भी केस दर्ज किया गया है। सीबीआई द्वारा मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।




