
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि समुद्री व्यापार, बुनियादी ढाँचे, डिजिटलीकरण, डेटा केंद्रों और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भारत और सिंगापुर के बीच बढ़ते सहयोग और कई समझौता ज्ञापनों से न केवल आर्थिक संबंध मज़बूत होंगे, बल्कि महाराष्ट्र और सिंगापुर के रिश्तों को भी नया आयाम मिलेगा। उन्होंने वधुवन बंदरगाह के विकास में भी सिंगापुर के सहयोग की उम्मीद जताई। उरण स्थित जेएनपीए व्यापार केंद्र में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, जेएनपीए और भारतीय बंदरगाह संघ द्वारा आयोजित हरित और डिजिटल समुद्री गलियारा नेताओं के संवाद में मुख्यमंत्री ने बताया कि जेएनपीए में नया पीएसए टर्मिनल जल्द शुरू होगा, जो जेएनपीए की कंटेनर क्षमता का 50 प्रतिशत संभालेगा और भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता को बढ़ाएगा। उन्होंने हरित और डिजिटल समुद्री गलियारों के लिए भारत-सिंगापुर सहयोग पर बल देते हुए कहा कि दोनों देश नई तकनीकों, हरित ईंधन और दक्षता में साझेदारी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वधुवन बंदरगाह परियोजना को भारत की सबसे बड़ी बंदरगाह परियोजना बताते हुए भरोसा जताया कि यह समय पर पूरी होगी और भारत को समुद्री महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी। इस अवसर पर सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री गान किम येउंग ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत और सिंगापुर मिलकर हरित और डिजिटल शिपिंग कॉरिडोर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने पीएसए द्वारा भारत मुंबई कंटेनर टर्मिनल चरण 2 के पूरा होने को दोनों देशों की मजबूत साझेदारी का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार और सिंगापुर की मैपलट्री इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच 3,000 करोड़ रुपये के निवेश और 5,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन से जुड़ा एक एमओयू भी हस्ताक्षरित हुआ। इस मौके पर सिंगापुर के परिवहन मंत्री जेफरी सियो, जेएनपीए अध्यक्ष उन्मेष वाघ और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव टी.के. रामचंद्रन भी मौजूद रहे।




