
नई दिल्ली। उद्योग एवं मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार स्टार्टअप्स, स्वयं सहायता समूहों और ‘एक ज़िला एक उत्पाद’ द्वारा निर्मित उत्पादों को उचित बाज़ार उपलब्ध कराने और लघु उद्योगों के व्यापार को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने प्रगति मैदान में आयोजित 44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में शुक्रवार को महाराष्ट्र मंडप का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उद्योग विभाग के सचिव डॉ. पी. अंबाल्गन, महाराष्ट्र सदन की आवासीय आयुक्त एवं सचिव आर. विमला, महाराष्ट्र लघु उद्योग विकास निगम के प्रबंध निदेशक विवेक पानसरे, संयुक्त प्रबंध निदेशक प्रशाली दिघावकर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। महाराष्ट्र को इस मेले में भागीदार राज्य का विशेष दर्जा दिया गया है और मंत्री सामंत ने विश्वास जताया कि यह मंडप राज्य के विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने मंडप में उपस्थित सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया और स्टॉल धारकों से उनके उत्पादों के बारे में जानकारी ली। इस सम्मेलन में झारखंड को फोकस राज्य और उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और राजस्थान को भागीदार राज्य के रूप में विशेष दर्जा दिया गया है। महाराष्ट्र मंडप 1098 वर्ग मीटर में फैला है और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा पर आधारित भव्य डिज़ाइन के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को प्रदर्शित करता है। हॉल में भारत का विशाल त्रि-आयामी मानचित्र और शिवाजी महाराज के प्रमुख किलों जैसे रायगढ़, प्रतापगढ़, सिंधुदुर्ग और तोरणा के लघु मॉडल शामिल हैं। स्वागत कक्ष कोल्हापुर की स्वर्ग मंडप शैली में बनाया गया है, जिसमें बाईं ओर शास्त्रीय मराठी भाषा और दाईं ओर शिवाजी महाराज के नौसैनिक दृष्टिकोण पर आधारित हॉल है। महाराष्ट्र मंडप में 60 स्टॉल हैं, जो सरकारी विभागों, ‘एक ज़िला-एक उत्पाद’, महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित हैं। यहाँ पैठणी साड़ियाँ, कोल्हापुरी चप्पलें, चमड़े के सामान, घरेलू सजावट, हस्त चित्रकारी, जैविक उत्पाद, लकड़ी और बाँस के उत्पाद, खादी और हथकरघे पर पैठणी बुनाई सहित खाद्य उत्पाद प्रदर्शित और बेचे जा रहे हैं। गैलरी की दीवारें महाराष्ट्र के औद्योगिक, कृषि, हरित ऊर्जा और पर्यावरणीय विकास की कहानी दर्शाती हैं। एक दीवार महाराष्ट्र की जीडीपी वृद्धि पर केंद्रित है और दूसरी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के योगदान पर। यह मंडप महाराष्ट्र की विविधता, आत्मनिर्भरता और सतत विकास की कहानी उजागर करता है, जिससे स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।




