
नेवल एयर स्टेशन के कमांडिंग ऑफिसर की याचिका, राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना केंद्र
मुंबई। दक्षिण मुंबई स्थित संवेदनशील नेवल एयर स्टेशन और वीवीआईपी हेलीपोर्ट आईएनएस शिकरा के नजदीक हो रहे कथित अवैध निर्माण को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। नेवल स्टेशन के कमांडिंग ऑफिसर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 16 फरवरी की आधी रात से 18 फरवरी तक संबंधित निर्माण स्थल पर किसी भी वर्कर या अन्य व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि इस अवधि के बाद मामले में आगे के आदेश पारित किए जाएंगे। जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और जस्टिस अभय जे. मंत्री की डिवीजन बेंच ने यह अंतरिम आदेश उस समय पारित किया जब बिल्डर पक्ष के वरिष्ठ वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि निर्माण से जुड़ी सभी गतिविधियां फिलहाल रोक दी जाएंगी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस दौरान किसी भी प्रकार की गतिविधि के लिए किसी भी कर्मचारी का परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दक्षिण मुंबई में स्थित जाधवजी मैंशन नामक ऊंची इमारत का निर्माण आईएनएस शिकरा से मात्र 246 मीटर की दूरी पर किया जा रहा है और यह निर्माण आवश्यक सैन्य अनुमति (एनओसी) लिए बिना किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2011 के बाद भवन योजना में कई बदलाव कर अवैध रूप से इसकी ऊंचाई और मंजिलों की संख्या बढ़ा दी गई, जिससे नेवल बेस और हेलिपोर्ट क्षेत्र में सीधी ‘लाइन ऑफ साइट’ बन गई है, जो सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा है। याचिका में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर भी आरोप लगाया गया है कि उसने मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा 354-ए के तहत उपलब्ध शक्तियों का उपयोग नहीं किया, जबकि उसे कथित अवैध निर्माण रोकने का अधिकार है। नेवी की ओर से दावा किया गया है कि कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद सिविक प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। कोर्ट में दलील देते हुए याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि आईएनएस शिकरा की ऑपरेशनल संवेदनशीलता और वीवीआईपी हेलिपोर्ट की सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिए गए निर्माण अनुमति आदेश कानूनन टिकाऊ नहीं हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री की संभावित आवाजाही को देखते हुए यह मामला और अधिक संवेदनशील हो जाता है।राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने पूरी इमारत को ध्वस्त करने की मांग की है। उनका तर्क है कि अवैध निर्माण से किसी भी प्रकार के तीसरे पक्ष के अधिकार उत्पन्न नहीं हो सकते। हाई कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 18 फरवरी को करेगा, जहां आगे की कार्रवाई और आदेश तय किए जाएंगे।




