
इंद्र यादव
नांदेड़। नांदेड़ जिले के जवाला मुरार गांव की गलियां आज सन्नाटे और मातम में डूबी हुई हैं। जिस घर से कल तक खेती-बाड़ी, फसलों और भविष्य के सपनों की बातें सुनाई देती थीं, आज वहां पुलिस की गाड़ियां खड़ी हैं और पड़ोसियों की सिसकियां गूंज रही हैं। एक ही किसान परिवार के चार सदस्यों की दर्दनाक मौत ने न केवल गांव, बल्कि पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है।
एक घर, चार अर्थियां और अनगिनत सवाल
गुरुवार की सुबह जब गांव के लोग रोज़मर्रा की तरह खेतों की ओर निकल रहे थे, किसी को अंदेशा नहीं था कि लाखे परिवार की दुनिया उजड़ चुकी है। 51 वर्षीय किसान रमेश सोनाजी लाखे और उनकी पत्नी राधाबाई अपने घर के भीतर एक चारपाई पर मृत पाए गए। वहीं, कुछ ही दूरी पर रेलवे पटरियों पर उनके दो जवान बेटों—उमेश (25) और बजरंग (23) के शव बरामद किए गए। बेटों की मौत की खबर ने इस त्रासदी को और भी भयावह बना दिया। प्रारंभिक जांच में पुलिस का मानना है कि दोनों युवकों ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या की है। घर के भीतर माता-पिता और बाहर रेलवे ट्रैक पर बेटों की मौत, किसी बड़े और सुनियोजित सुसाइड पैक्ट की आशंका को जन्म दे रही है।
मिट्टी से सोना उगाने वाले खुद मिट्टी में मिल गए
ग्रामीणों के अनुसार, लाखे परिवार बेहद मेहनती और शांत स्वभाव का था। वे सीमित संसाधनों में छोटी जोत पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। दिन-रात की मेहनत के बावजूद जीवन की चुनौतियां कम नहीं थीं। सवाल यह है कि आखिर वह कौन-सी मजबूरी थी-कर्ज का बोझ, फसल का नुकसान या कोई गहरा पारिवारिक तनाव—जिसने दो जवान बेटों और उनके माता-पिता को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया?
एक ग्रामीण ने नम आंखों से बताया- वे कभी किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे। खेती की मुश्किलें हम सब झेलते हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं जताया कि वे अंदर से इतने टूट चुके हैं। पुलिस इंस्पेक्टर दत्तात्रेय मंथले ने बताया कि फोरेंसिक टीम ने मौके से जरूरी साक्ष्य जुटा लिए हैं और सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है—चाहे वह आर्थिक संकट हो, पारिवारिक तनाव हो या कोई अन्य कारण। नांदेड़ की यह घटना केवल एक परिवार की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस गहरे ग्रामीण और किसान संकट की झलक है, जहां अथक मेहनत के बावजूद भविष्य की अनिश्चितता किसानों को अंदर ही अंदर तोड़ देती है। एक पिता की उम्मीदें, एक मां का सहारा और दो जवान बेटों के सपने—आज एक सूनी चारपाई और रेलवे पटरियों के बीच हमेशा के लिए खत्म हो गए हैं।



