
मेरठ, उत्तर प्रदेश। मेरठ जिले के दौराला थाना क्षेत्र में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया, जब सरकारी ठेके से खरीदी गई कथित जहरीली शराब पीने से तीन लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने न सिर्फ तीन परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतकों की पहचान सरस्वती कॉलोनी निवासी कारोबारी बाबूराम (60) और उनके कर्मचारी जितेंद्र (45) व अंकित (32) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि तीनों शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे स्थानीय सरकारी देशी शराब के ठेके पर पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शराब पीने के कुछ ही मिनटों के भीतर तीनों की हालत बिगड़ने लगी। उन्हें तेज उल्टियां होने लगीं और वे दर्द से तड़पते हुए जमीन पर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। आर्यावर्त अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जितेंद्र और अंकित को मृत घोषित कर दिया, जबकि बाबूराम को वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन कुछ ही देर में उन्होंने भी दम तोड़ दिया। एक साथ तीन मौतों की खबर से अस्पताल और इलाके में कोहराम मच गया, वहीं परिजनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। आबकारी विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए संबंधित शराब ठेके पर छापेमारी की। ठेके से शराब के नमूने जब्त कर जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। साथ ही ठेके के सेल्समैन और एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—यदि सरकारी ठेके पर बिकने वाली शराब ही जानलेवा साबित हो रही है, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? क्या मिलावटखोरी और शराब माफिया की सांठगांठ से यह खतरनाक खेल चल रहा है? फिलहाल, दौराला पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे इलाके में एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन लोगों के मन में एक ही सवाल है—क्या इन मौतों को इंसाफ मिलेगा?




