Monday, January 12, 2026
Google search engine
HomeCrimeमामूली टक्कर से मर्डर तक: वाराणसी में नशे, बंदूक संस्कृति और टूटते...

मामूली टक्कर से मर्डर तक: वाराणसी में नशे, बंदूक संस्कृति और टूटते कानून का खौफ

इंद्र यादव
वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
वाराणसी की पावन धरती, जहाँ लोग मोक्ष और शांति की तलाश में आते हैं, वहां बड़ागांव क्षेत्र में जो हुआ उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। समीर सिंह, एक ऐसा नाम जो अब केवल पुलिस की फाइलों और परिवार के आंसुओं में सिमट कर रह गया है। महज़ एक बाइक की मामूली टक्कर—ऐसी बात जिसे आपसी समझदारी से सुलझाया जा सकता था—उसे खूनी रंजिश में बदल दिया गया। जब समाज में कानून का डर खत्म हो जाता है और नसों में शराब का जहर दौड़ने लगता है, तो विवेक मर जाता है। करन प्रजापति, प्रेमशंकर पटेल और शुभम मौर्य जैसे युवक उस शाम केवल शराब के नशे में नहीं थे, बल्कि वे उस अहंकार के नशे में चूर थे जो उन्हें लगाता है कि वे कानून से ऊपर हैं। सरेआम गोलियां चलाना इस बात का प्रमाण है कि अपराधियों के मन में पुलिस और प्रशासन का खौफ किस कदर खत्म हो चुका है।
तमाशबीन समाज और मासूम की बलि
समीर सिंह का क्या कसूर था! वह तो बस उस समय वहां मौजूद था। इस घटना में रामू यादव भी गंभीर रूप से घायल हुए, जो आज भी उस खौफनाक मंजर की गवाही दे रहे हैं। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि हमारे मोहल्लों में, हमारी सड़कों पर ‘बंदूक संस्कृति’ किस कदर जड़ें जमा रही है। “सवाल यह नहीं है कि पुलिस ने कितने कैमरों की फुटेज खंगाली, सवाल यह है कि हमारे नौजवानों के हाथों में किताबों और रोजगार की जगह अवैध तमंचे और शराब की बोतलें कहाँ से आ रही हैं!” डीसीपी द्वारा पुलिस टीम को 25,000 रुपए का इनाम देना और 100 से ज्यादा कैमरों की फुटेज खंगालना प्रशासन की सक्रियता तो दिखाता है, लेकिन असली न्याय तब होगा जब फरार चल रहे बाकी 5 आरोपी भी सलाखों के पीछे होंगे। न्याय केवल गिरफ्तारी में नहीं, बल्कि ऐसी सजा में है जो आने वाले समय के लिए नजीर बन सके। यह समय केवल शोक मनाने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का है। क्या हम एक ऐसा समाज बना रहे हैं जहाँ बात-बात पर गोलियां चलेंगी! क्या हमारी नई पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आकर कातिल बनती रहेगी! समीर सिंह की मौत एक परिवार का अंत नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक सुरक्षा तंत्र की विफलता है। यदि आज हम इन घटनाओं के खिलाफ मुखर नहीं हुए, तो कल किसी और का ‘समीर’ इस अंधे कानून और बेखौफ अपराधियों की भेंट चढ़ जाएगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments