Tuesday, January 13, 2026
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‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 3.71 करोड़ की ठगी: पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ व सरकारी अफसरों का रूप धारण कर साइबर ठगों ने बुजुर्ग महिला को बनाया शिकार

मुंबई। साइबर अपराधियों ने एक बार फिर कानून और न्यायपालिका की साख का दुरुपयोग करते हुए मुंबई की 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला से 3.71 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश कर महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किए जाने का भय दिखाया। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने गुजरात के सूरत से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के दो मुख्य सरगना विदेश में बैठे होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह धोखाधड़ी 18 अगस्त से 13 अक्टूबर के बीच हुई। 18 अगस्त को महिला को एक फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को कोलाबा पुलिस थाने का अधिकारी बताया और दावा किया कि महिला के बैंक खाते का इस्तेमाल धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया जा रहा है। आरोपी ने महिला को डराते हुए कहा कि मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है।
भरोसा जीतने के लिए अपनाए गए मनोवैज्ञानिक हथकंडे
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने खुद को अधिकारी ‘एस. के. जायसवाल’ बताकर महिला से उसके जीवन पर दो–तीन पन्नों का निबंध भी लिखवाया। इसके बाद उसने महिला को भरोसा दिलाया कि वह उसकी निर्दोषता से सहमत है और उसे जमानत दिलाने में मदद करेगा। इसी विश्वास के सहारे साइबर ठगों ने अगले चरण की ठगी को अंजाम दिया।
वीडियो कॉल पर फर्जी अदालत, नकली जज की भूमिका
इसके बाद महिला को वीडियो कॉल के जरिए एक कथित अदालत कक्ष में ‘पेश’ किया गया, जहां एक व्यक्ति ने खुद को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ बताते हुए निवेश और बैंक लेन-देन के सत्यापन के नाम पर विवरण मांगा। अदालत की इस फर्जी कार्यवाही से घबराई महिला ने दो महीनों के भीतर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 3.71 करोड़ रुपये स्थानांतरित कर दिए। जब अचानक फोन कॉल और संपर्क बंद हो गए, तब महिला को अपने साथ हुई ऑनलाइन धोखाधड़ी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पश्चिम क्षेत्र साइबर पुलिस थाने से संपर्क किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई ‘म्यूल खातों’ में ट्रांसफर की गई थी। म्यूल खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराधी अवैध धन को प्राप्त करने, घुमाने या वैध दिखाने के लिए करते हैं, अक्सर खाताधारक की सीमित या बिना जानकारी के।
सूरत से आरोपी गिरफ्तार, कमीशन के बदले उपलब्ध कराया खाता
जांच के दौरान पुलिस को गुजरात के सूरत में एक ऐसा म्यूल खाता मिला, जिसके जरिए बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी। साइबर पुलिस की टीम ने पिछले सप्ताह सूरत से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। आरोपी ने कपड़ा व्यापार के नाम पर एक फर्जी कंपनी बनाकर चालू खाता खुलवाया था और उसी खाते को साइबर ठगों को उपलब्ध कराया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खाते में 1.71 करोड़ रुपये जमा किए गए थे, जिसके बदले उसे 6.40 लाख रुपये का कमीशन मिला। पूछताछ में उसने गिरोह के दो मुख्य सरगनाओं की पहचान की है, जो फिलहाल विदेश में छिपे हुए हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के ‘डिजिटल अरेस्ट’, वीडियो कॉल पर अदालत या अधिकारी बनकर की गई मांगों से सतर्क रहें और ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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