
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से बड़े पैमाने पर हुई तबाही के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व वाली सरकार और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बीच टकराव गहरा गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से हिंदू तीर्थ स्थलों पर हुई मौतों में लापरवाही की जांच के लिए एक पैनल गठित करने की मांग की है।
तीर्थयात्राओं के दौरान 100 से अधिक लोगों की मौत
जम्मू के पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले पखवाड़े में कम से कम 100 लोगों की मौत हुई है। इनमें मुख्य रूप से हिंदू तीर्थयात्री शामिल हैं। मचैल माता मंदिर (किश्तवाड़) के मार्ग पर 14 अगस्त को अचानक बाढ़ आई, जिसमें 60 से अधिक लोग मारे गए। इसके अलावा, कटरा से माता वैष्णो देवी मंदिर तक 12 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर मंगलवार को भूस्खलन हुआ, जिसमें 35 श्रद्धालुओं की जान गई।
उपमुख्यमंत्री ने एलजी पर गंभीर आरोप लगाए
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने लगातार बारिश और बादल फटने की चेतावनी के बावजूद तीर्थयात्राएं जारी रखने की अनुमति देने के लिए एलजी मनोज सिन्हा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इसे “आपराधिक साजिश” करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की।
मुआवजे पर भी अलग-अलग घोषणाएं
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मृतकों के परिजनों के लिए छह लाख रुपये का मुआवजा घोषित किया, जबकि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नौ लाख रुपये की सहायता की घोषणा की। इस पर भी राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री चौधरी ने आरोप लगाया कि रियासी जिले के त्रिकुटा हिल स्थित वैष्णो देवी यात्रा में श्राइन बोर्ड के प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। उन्होंने कहा कि जब बाढ़ और तबाही जारी थी, उस समय एलजी सिन्हा उत्तर प्रदेश और बिहार में थे और यात्रा रोकने के लिए कोई आदेश नहीं दिया।
झेलम का जलस्तर घटा, पर खतरा अभी बाकी
इस बीच, कश्मीर घाटी से गुजरने वाली झेलम नदी का जलस्तर घटने से कुछ राहत मिली है। कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने निवासियों को मौसम संबंधी अलर्ट का पालन करने की सलाह दी है और अगले आठ दिनों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।