
मुंबई। कोकण तटवर्ती क्षेत्र और पठारी इलाकों में पाए जाने वाले एक हजार से अधिक प्राचीन कातळशिल्पों (जिओग्लिफ्स) के गहन शोध, दस्तावेजीकरण और संरक्षण के लिए ‘वर्ल्ड हेरिटेज डेस्क’ की स्थापना की गई है। इस परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा कुल 14 करोड़ 62 लाख 32 हजार 671 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। बुधवार को यह जानकारी सांस्कृतिक कार्य एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार ने दी। मंत्री शेलार ने बताया कि कोकण क्षेत्र में स्थित ये कातळशिल्प आद्य-ऐतिहासिक मानव की जीवनशैली, संस्कृति तथा उस काल के जैविक और सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन शिल्पों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने के उद्देश्य से इनके नामांकन का प्रस्ताव यूनेस्को को भेजने के लिए केंद्र सरकार को भी अनुरोध प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। वर्ल्ड हेरिटेज डेस्क वर्ष 2026 से 2029 तक कार्यरत रहेगी। इसके अंतर्गत मुंबई और रत्नागिरी में दो शाखाएं स्थापित की जाएंगी। मुंबई शाखा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय शोध सामग्री का अध्ययन, डेटाबेस निर्माण, यूनेस्को मानकों के अनुरूप आवश्यक मानदंडों का विकास तथा शोध लेखन का कार्य किया जाएगा। वहीं रत्नागिरी शाखा द्वारा क्षेत्रीय सर्वेक्षण, जीपीएस आधारित मानचित्रण, ड्रोन के माध्यम से कातळशिल्पों का दस्तावेजीकरण, स्थानीय लोककथाओं का संकलन तथा जनजागरूकता अभियान संचालित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त इस परियोजना के अंतर्गत कातळशिल्पों की प्राचीनता, उनके निर्माण काल तथा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर वैज्ञानिक शोध भी किया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक मानव संसाधन, वैज्ञानिक परीक्षण, उपकरण, परिवहन तथा अन्य व्यवस्थाओं पर व्यय किया जाएगा। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पुरातत्व एवं वस्तुसंग्रहालय संचालनालय, मुंबई को सौंपी गई है। मंत्री शेलार ने यह भी बताया कि इन कातळशिल्पों को वैश्विक पहचान दिलाने और उनमें निहित अति प्राचीन इतिहास को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक विशेष वृत्तचित्र भी तैयार किया जाएगा। इससे कोकण की कातळकला को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी तथा भविष्य में क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।




