Saturday, August 30, 2025
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संपादकीय: आत्म मंथन करें धर्म के ठेकेदार!

यह सच है कि कभी वृहत्तर भारत हुआ करता था। यह भी सच है कि सनातन धर्म ही विश्व में स्थापित एकमात्र धर्म था। आज कुछ लोग हिंदुओं को चेताते हुए, नहीं डराते हुए कहते हैं – ईरान पारसियों का देश था। तीस मुसलमानों को शरण दी गई। मुसलमानों ने कब्जा कर लिया। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश के विषय में ही नहीं, कश्मीर, केरल और वेस्ट बंगाल के विषय में भी ऐसा ही डर दिखाया जा रहा है। सवाल उठता है– यहूदी धर्म 2030 साल पूर्व अस्तित्व में आया। ईसाई धर्म 2025 साल, तो इस्लाम 1450 साल पहले आया। पारसी अग्यारी करते हैं, जो वैदिक संस्कृति का द्योतक है। आज ईसाइयों के सैकड़ों देश और इस्लामिक 56 देश बन गए, कैसे? क्यों सिर्फ हिंदुओं द्वारा ही धर्म परिवर्तन किया जाता है? अंग्रेज आए। समुद्री तटों और पूर्वोत्तर की पहाड़ियों में गरीब रहते थे। भारत के हिंदू राजाओं को उनके भोजन, वस्त्र, शिक्षा की तनिक भी चिंता नहीं थी। अंग्रेज आए तो उन गरीबों के लिए चर्च, स्कूल और डिस्पेंसरियां खोलीं। निर्धनों को शिक्षा, चिकित्सा – दो मूलभूत सुविधाएं दीं। पादरी स्वस्थ हुए लोगों को चर्च में, जब गरीब बीमार ठीक होने के बाद धन्यवाद कहने जाते थे, तब ईसा मसीह की प्रतिमा की ओर संकेत करके कहते– नहीं, हमें धन्यवाद मत कहो, ठीक करने वाले तो ये हैं। भारत पर विदेशी आक्रमण के पूर्व एक भी मुस्लिम नहीं था। वृहद भारत में केवल हिंदू राजाओं, महाराजाओं का ही शासन था। वे कहीं चौथ, तो कहीं छठा भाग बिना कोई सुविधा दिए लेते रहे। कारिंदे कोड़े मारकर वसूलते रहे। प्रजा का शोषण कर, अपनी अय्याशी के लिए बड़े-बड़े किले, जल महल जैसे महल बनवाए। इतने विशाल निर्माण के लिए जबरन मजदूर, शिल्पकारों से बेगार लेकर क्या उचित अथवा न्याय कर रहे थे? जितना अपने सुख वैभव का ध्यान रखते थे, प्रजा को शिक्षा, चिकित्सा, भोजन के लिए क्या किया? वृहत्तर भारत में जब केवल हिंदू राजा थे, तो ईरान, अफगानिस्तान मुस्लिम राष्ट्र कैसे बने? ईसाई हो या इस्लाम, तलवार के बल पर जबरन नहीं फैला। गौतम बुद्ध तो भारत के ही राजकुमार थे। सुख वैभव त्याग दिए। संन्यासी सा जीवन व्यतीत करते थे। बौद्धगया में उन्हें सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ। सारनाथ, काशी में उन्होंने सद्ज्ञान पाँच ब्राह्मणों को दिया। धीरे-धीरे अपने आप लोग बौद्ध मतावलंबी होने लगे। आज संपूर्ण दक्षिणी-पूर्वी राष्ट्रों में बौद्ध धर्म के अनुयाई हैं, तो क्या मगध साम्राज्य के सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार तलवार के बूते कराया? दुनिया का एक तिहाई राष्ट्र बौद्ध धर्मी है, कैसे?
धर्म व्यक्तिगत मामला है। सनातन धर्म के पतन के लिए हिंदू राजा-महाराज पूरी तरह जिम्मेदार रहे। उन्होंने अपना आधिपत्य जमाए रखने के लिए सनातन संस्कृति, धर्म ग्रंथों में अपनी सुविधानुसार धूर्तों द्वारा क्षेपक जुड़वाए। सनातन धर्म का सर्वनाश कर दिया। तलवार के बल पर भारत में इस्लाम फैला होता तो बाबर के विरुद्ध युद्ध में राणा सांगा के साथ सारे हिंदू राजा मिलकर लड़ते। केवल एक मुसलमान सुल्तान राणा सांगा का साथ नहीं देता। जब सारे राजपूत राजा अपनी रियासत बचाने के लिए मुगलों से अपनी बहन-बेटियों का निकाह करा रहे थे, तब भी अकेले महाराणा प्रताप ने अकबर की गुलामी स्वीकार नहीं की। प्रताप का सेनापति मुसलमान था, जबकि अकबर का सेनापति मानसिंह राजपूत राजा थे। इसी तरह शिवाजी के विरुद्ध मुगल सेनापति राजपूत रहा, जबकि शिवाजी का सेनापति मुसलमान रहा। यही नहीं, उनके तोपखाने और जलसेना का अधिपति मुसलमान ही था। कैसे कहा जा सकता है कि महाराणा प्रताप और शिवाजी के समय मुसलमानों और हिंदुओं का युद्ध हुआ? क्या कारण था कि शिवाजी के राज्याभिषेक के लिए कोई विद्वान ब्राह्मण सामने नहीं आया? शूद्र कहकर मना कर दिया गया। फिर काशी के विद्वान गागा भट्ट को बुलाकर राज्याभिषेक कराया गया। 500 साल मुगलों के गुलाम रहे। 200 साल अंग्रेजी दासता सही। 67 साल कांग्रेस का शासन रहा। तब कभी भी हिंदू खतरे में नहीं आया। आज 11 वर्षों से हिंदू धर्म की ठेकेदारी बीजेपी ने लेकर सत्ता हासिल कर ली, तो हिंदू खतरे में आ गया? झूठ की एक सीमा होती है, लेकिन बीजेपी सीमा लांघकर बहुत आगे निकल गई। आज देश में विहिप को जनता के चंदे से बनाए गए राम मंदिर की व्यवस्था दे दी गई है, जहाँ ओबीसी और एससी-एसटी को दर्शन-पूजन का अधिकार नहीं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव मंदिर में जाकर पूजा-पाठ करते हैं, तो मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करने का नाटक किया जाता है। मंदिरों में वीआईपी व्यवस्था की गई है। एक डीएम जबरन मंदिर में कतार तोड़कर पूजा करने जाता है। पुलिस रोकती है, तो डीएम कथित रूप से थप्पड़ मारता है, जिस पर पुलिस उसकी धुलाई कर देती है। एक थानेदार से जब बजरंग दल के लोग चंदा मांगने जाते हैं, मना करने पर ईसाई धर्म के प्रचारकों के साथ मिले होने के आरोप लगाए जाते हैं। बजरंग दल के खिलाफ एक्शन लेने वाले थानेदार का ट्रांसफर कर दिया जाता है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे देने वाली बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद कर रही है। शिक्षा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दी है ताकि महंगी शिक्षा के कारण 95 प्रतिशत हिंदू शिक्षा पा न सकें। आज देश की बेटियों के साथ बलात्कार किया जाता है। हर जगह बीजेपी के लोगों, उनके बेटों के नाम क्यों आते हैं? विधायक भी रेप और मर्डर के लिए आरोपित क्यों हो रहे? आज 11 वर्षों में बीजेपी ने हिंदुओं के साथ छल करने के अलावा किया ही क्या है? दलित, ओबीसी तभी हिंदू होते हैं जब वोट लेना होता है, अन्यथा ब्राह्मणों को भी शासन-प्रशासन द्वारा प्रताड़ित क्यों किया जा रहा है? जाति विशेष के माफियाओं को क्यों बचाया जा रहा? उनके घरों पर बुलडोजर क्यों चलाए जा रहे? दिल्ली सहित सभी बीजेपी शासित राज्यों में गरीबों के झोपड़े क्यों तोड़कर पूंजीपतियों को दिए जा रहे? आखिर 11 वर्षों में हिंदुओं के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक अधिकारों को क्यों छीना जा रहा? जब जनता जागने लगी, बीजेपी की असलियत जान गई, तो चुनाव आयोग द्वारा बिहार ही नहीं, समूचे देश में वोट चोरी के प्रमाण मिल रहे। बीजेपी के नेता 50 साल और सत्ता में रहने के दावे चुनाव आयोग की बेइमानी के चलते ही कर रहे थे, जो जनता के सामने आ रही है। चुनाव आयोग नया पैंतरा चला रहा है – डिजिटल वोटिंग का। सिस्टम तो बिल्कुल सही, ईमानदार, पारदर्शी है। लेकिन जब चुनाव आयोग की मंशा ही गलत है, तो वोटिंग सिस्टम चाहे जो हो, बेइमानी तो करेगा ही। बीजेपी, आरएसएस, बजरंग दल, विहिप जैसे कथित हिंदू संगठनों को बार-बार मंथन करना होगा कि हिंदुओं के लिए किया ही क्या है? जब जातियों में बांटने की कुत्सित नीति चलेगी, तो हिंदुत्व का मुद्दा खत्म समझना होगा। बीजेपी सरकार ने सैकड़ों वादे किए, लेकिन पूरा एक भी नहीं किया। फिर उनमें और हिंदू राजाओं में फर्क क्या? जिस धर्म में भेदभाव, छुआछूत, अन्याय, अधर्म होता रहेगा, तो हिंदू उस तरफ मुड़ेगा जिस धर्म में कम से कम बेइज्जती, अन्याय, अत्याचार, भेदभाव तो नहीं किया जाता। इसलिए यह कहना सरासर झूठ होगा कि तलवार के बूते इस्लाम फैला। इस्लाम, ईसाइयत, बौद्धिज़्म– हिंदू शासकों के अन्याय, अत्याचार के कारण फैला है। इसी कारण आज गरीब, पीड़ित, उपेक्षित, दलित हिंदू धर्म छोड़कर दूसरा अच्छा धर्म अपनाने लगे हैं।

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