
मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी (एडीए) समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी को नया समन जारी किया है, जिसमें उन्हें सोमवार, 17 नवंबर को दिल्ली मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले, ईडी ने उनके वर्चुअल बयान देने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। अनिल अंबानी ने एजेंसी को ईमेल भेजकर वर्चुअल उपस्थिति की पेशकश की थी, लेकिन ईडी ने स्पष्ट किया कि “अंबानी वर्चुअल रूप से पेश नहीं होंगे।” उन्होंने मीडिया बयान में कहा कि वे फेमा के तहत चल रही जाँच में पूरा सहयोग करेंगे। वर्तमान जांच जयपुर-रींगस (जेआर) राजमार्ग परियोजना के ईपीसी अनुबंध से जुड़ी 15 साल पुरानी जाँच से संबंधित है। ईडी को संदेह है कि हवाला के ज़रिए लगभग 100 करोड़ रुपये कथित रूप से विदेश भेजे गए थे। एजेंसी ने पहले ही कई कथित हवाला संचालकों सहित अन्य व्यक्तियों के बयान दर्ज कर लिए हैं। 30 सितंबर को आरइन्फ्रा और उसके पूर्व सड़क ठेकेदार के मुंबई और इंदौर स्थित परिसरों की तलाशी ली गई थी। जयपुर-रींगस टोल रोड का संचालन आरइन्फ्रा की सहायक कंपनी जेआर टोल रोड प्राइवेट लिमिटेड करती है। 2010 में आरइन्फ्रा ने राष्ट्रीय राजमार्ग-11 के 52 किलोमीटर हिस्से के लिए ईपीसी अनुबंध पाथ ग्रुप को दिया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि परियोजना की लागत बढ़ाकर दिखाकर धन को हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा गया। परियोजना के कुछ हिस्सों को उप-ठेके पर दिया गया और भुगतान सूरत स्थित फर्जी कंपनियों के माध्यम से दुबई ट्रांसफर किया गया। ईडी ने 3 नवंबर को कहा कि तलाशी अभियान में जयपुर-रींगस परियोजना से 40 करोड़ रुपये की हेराफेरी का पता चला, और 600 करोड़ रुपये से अधिक के अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके जवाब में आरइन्फ्रा ने कहा कि ईपीसी अनुबंध पूरी तरह घरेलू था और विदेशी मुद्रा का कोई घटक नहीं था। कंपनी ने यह भी बताया कि अनिल अंबानी अप्रैल 2007 से मार्च 2022 तक गैर-कार्यकारी निदेशक थे और दैनिक कार्यों में शामिल नहीं थे।



