
मुंबई। स्वतंत्रता दिवस के दिन मांस बिक्री पर रोक के आदेश ने महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के इस फैसले पर उद्धव ठाकरे गुट ने सवाल उठाए, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बयानों ने बहस को और हवा दी। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यह कोई नया आदेश नहीं है। उनके अनुसार, 1988 से यह निर्णय लागू है। उद्धव ठाकरे जब मुख्यमंत्री थे, तब भी यह नियम था। अब भी वही स्थिति है। सरकार लोगों के भोजन विकल्पों को नियंत्रित करने की इच्छुक नहीं है, लेकिन 15 अगस्त को बूचड़खाने बंद करने को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया है।
अजित पवार का विरोध— आहार पर पाबंदी उचित नहीं
डिप्टी सीएम अजित पवार ने इस प्रतिबंध पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, यह लोगों का आहार है, और उस पर पाबंदी लगाना उचित नहीं। अगर 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन मांस बंदी लगाई जाएगी तो यह कठिन हो जाएगा। पवार ने तर्क दिया कि इस तरह के प्रतिबंध आमतौर पर आषाढ़ी एकादशी, महाशिवरात्रि, महावीर जयंती जैसे अवसरों पर धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए लगाए जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि बड़े शहरों में विभिन्न जाति और धर्म के लोग रहते हैं। अगर यह भावनात्मक मुद्दा है तो लोग एक दिन के लिए स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन महाराष्ट्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ऐसे आदेश जारी करना मुश्किल है।