
मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश में भारत जनगणना 2027 के प्रथम चरण की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की
देवेश प्रताप सिंह राठौर/झाँसी, उत्तर प्रदेश। भारत की जनगणना 2027 को सफल, पारदर्शी और सटीक बनाने के उद्देश्य से तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। एस.पी. गोयल, मुख्य सचिव, ने जनगणना को “जन-अभियान” के रूप में संचालित करने पर जोर देते हुए कहा कि जन-जन की सक्रिय भागीदारी से ही सही और विश्वसनीय आंकड़े प्राप्त किए जा सकते हैं, जो देश के विकास की दिशा तय करते हैं।मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों के साथ जनगणना 2027 के प्रथम चरण—मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना—की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक में मृत्युंजय कुमार नारायण, भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त, भी जुड़े और उन्होंने कार्यान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि घनी शहरी बस्तियों, झुग्गी क्षेत्रों और उच्च गतिशील आबादी वाले इलाकों में विशेष सावधानी बरतते हुए पूर्ण एवं त्रुटिरहित गणना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 5.5 लाख प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों की आवश्यकता होगी, जिसके मद्देनजर उनका सत्यापित एवं अद्यतन डिजिटल डेटाबेस 10 अप्रैल तक तैयार किया जाए।उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को फील्ड में तैनाती से पूर्व अनिवार्य, समग्र एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। यह प्रशिक्षण 16 अप्रैल से 7 मई के बीच आयोजित किया जाएगा, जबकि प्रशिक्षण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं—जैसे प्रोजेक्टर, प्रशिक्षण कक्ष, जलपान और उपस्थिति—6 मई तक पूर्ण कर ली जाएं।मुख्य सचिव ने गणना प्रक्रिया को त्रुटिरहित बनाने के लिए गणना ब्लॉकों का स्पष्ट सीमांकन, जियो-टैगिंग और तकनीकी सहायकों की शीघ्र भर्ती सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।उन्होंने बताया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी। डेटा संग्रहण, प्रविष्टि, सत्यापन और निगरानी सभी कार्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जाएंगे। इसके साथ ही नागरिकों के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।उत्तर प्रदेश में स्व-गणना पोर्टल 7 मई से 21 मई 2026 तक सक्रिय रहेगा, जिस पर कोई भी नागरिक अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेगा। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।इस अवसर पर मृत्युंजय कुमार नारायण ने जनगणना के ऐतिहासिक महत्व और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनगणना के आंकड़े देश के विकास का वास्तविक आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कई चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन जिला जनगणना अधिकारी के रूप में अपर जिलाधिकारी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पूरी निष्ठा से कार्य करना चाहिए।बैठक में शीतल वर्मा, निदेशक जनगणना, ने जनगणना 2027 की विस्तृत कार्ययोजना, समय-सीमा एवं डिजिटल रूपांतरण की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि जनगणना के प्रथम चरण में 22 मई से 20 जून 2026 तक मकानों की गणना की जाएगी, जबकि द्वितीय चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या की गणना होगी।बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व अपर्णा यू, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन मनीष चौहान, सचिव सामान्य प्रशासन अभिषेक प्रकाश सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।झाँसी स्थित एनआईसी केंद्र से जिलाधिकारी मृदुल चौधरी, नगर आयुक्त आकांक्षा राणा, मुख्य विकास अधिकारी जुनैद अहमद, एडीएम वित्त एवं राजस्व वरुण कुमार पांडेय, एडीएसडीओ केपी गुप्ता सहित अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।मुख्य सचिव ने अंत में कहा कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के भविष्य की योजना बनाने का आधार है। इसे जन-जन के सहयोग से एक व्यापक जन-अभियान के रूप में सफल बनाया जाना चाहिए।



