
जबलपुर, मध्य प्रदेश। महाराष्ट्र शिक्षण मंडल के शताब्दी समारोह में शामिल होने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस रविवार को जबलपुर पहुंचे। डुमना एयरपोर्ट पर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह सहित भाजपा पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। मानस भवन में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि यदि महाराष्ट्र शिक्षण मंडल जबलपुर में मराठी भाषा सिखाने के लिए कोई नया उपक्रम या कोर्स शुरू करता है, तो महाराष्ट्र सरकार उसे आवश्यक निधि और हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मराठी समाज का दृष्टिकोण कभी संकुचित नहीं रहा है, बल्कि वह हमेशा राष्ट्रव्यापी और वैश्विक सोच के साथ आगे बढ़ता रहा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने संस्था के पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे अगले 25 से 50 वर्षों की दीर्घकालिक योजना बनाएं और विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई चुनौतियों के लिए तैयार करें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नीति में मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है, यहां तक कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी क्षेत्रों में भी। छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘स्वराज्य’ के साथ ‘स्वधर्म’ और ‘स्वभाषा’ का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। पानीपत के युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मराठों ने केवल अपने साम्राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराष्ट्र शिक्षण मंडल को 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का संबंध केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक चेतना और विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 1926 में स्थापित यह संस्था स्वतंत्रता से पहले और बाद में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। मुख्यमंत्री यादव ने छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों से प्रेरित बाजीराव पेशवा, शिंदे, होलकर और गायकवाड़ जैसे मराठा शासकों के मध्य प्रदेश के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में योगदान को भी रेखांकित किया। प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे स्वयं इस विद्यालय के पूर्व छात्र रह चुके हैं और उन्होंने यहां चार महीने तक शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने कहा कि चार दशक पहले जबलपुर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए महाराष्ट्र हाई स्कूल, क्राइस्ट चर्च और मॉडल स्कूल जैसे गिने-चुने प्रतिष्ठित संस्थान ही उपलब्ध थे, जिनमें महाराष्ट्र शिक्षण मंडल का विशेष स्थान रहा है। शताब्दी समारोह में शिक्षा, भाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर देते हुए वक्ताओं ने यह संदेश दिया कि महाराष्ट्र शिक्षण मंडल आने वाले वर्षों में भी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और सामाजिक योगदान की अपनी परंपरा को आगे बढ़ाता रहेगा।




