
मुंबई। वर्तमान समय में ऑनलाइन आर्थिक लेनदेन का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों की घटनाओं में भी लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं को ऑनलाइन लेनदेन करते समय विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। यह बात भारतीय रिज़र्व बैंक के सहायक महाप्रबंधक पंकज बच्छाव ने कही। शुक्रवार को सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय और भारतीय रिज़र्व बैंक के संयुक्त तत्वावधान में मंत्रालय में आयोजित ‘आर्थिक लेनदेन विषयक जनजागरूकता’ सत्र में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय के निदेशक गोविंद अहंकारी, रिज़र्व बैंक की प्रबंधक शिल्पा छेड़ा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। सहायक महाप्रबंधक बच्छाव ने कहा कि यदि उपभोक्ता आवश्यक सावधानियां बरतें तो ऑनलाइन आर्थिक लेनदेन पूरी तरह सुरक्षित हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को कभी भी अपना ओटीपी, पिन, पासवर्ड या सीवीवी नंबर किसी को नहीं बताना चाहिए। बैंक या कोई भी आधिकारिक संस्था फोन, मैसेज या ई-मेल के माध्यम से इस प्रकार की जानकारी कभी नहीं मांगती। यदि ऐसा कोई कॉल या संदेश प्राप्त हो, तो उसे धोखाधड़ी समझकर नजरअंदाज करना चाहिए। उन्होंने बताया कि बैंकिंग, यूपीआई, वॉलेट या ऑनलाइन खरीदारी के दौरान की गई छोटी सी लापरवाही भी बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए केवल अधिकृत ऐप और वेबसाइट का ही उपयोग करें। ऐप डाउनलोड करते समय गूगल प्ले स्टोर या अधिकृत ऐप स्टोर का ही प्रयोग करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। ई-मेल या मैसेज में आए लिंक को खोलने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना आवश्यक है। बच्छाव ने यह भी सलाह दी कि ऑनलाइन लेनदेन के लिए मजबूत और मिश्रित पासवर्ड का उपयोग करें तथा उसे समय-समय पर बदलते रहें। एक ही पासवर्ड का कई जगह उपयोग न करें और जहां संभव हो वहां दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) को सक्रिय रखें। सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर बैंकिंग या वित्तीय लेनदेन करने से बचने की भी उन्होंने अपील की, क्योंकि ऐसे नेटवर्क पर डाटा चोरी का खतरा अधिक होता है। उन्होंने कहा कि लेनदेन के बाद खाते का विवरण, संदेश और ई-मेल नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की आशंका होने पर या गलत तरीके से राशि कटने की स्थिति में तुरंत बैंक से संपर्क करें और साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से नुकसान की भरपाई की संभावना बढ़ जाती है। इस अवसर पर आरबीआई की प्रबंधक शिल्पा छेड़ा ने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ग्राहकों के लिए शिकायत निवारण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यदि बैंक ग्राहक की शिकायतों का समाधान संतोषजनक ढंग से नहीं करता, तो ग्राहक ई-मेल या पत्र के माध्यम से सीधे रिज़र्व बैंक में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस जनजागरूकता सत्र में मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी प्रत्यक्ष तथा ऑनलाइन माध्यम से बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




