पुस्तक चर्चा: काश! मैं बादल होता
विवेक रंजन श्रीवास्तवकविता के लिए हमेशा किसी असाधारण घटना की जरूरत नहीं होती। एक खाली मेज़, उड़ती पतंग, पहली बारिश
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Read Moreराहूल हरीभाऊ इंगळे पाटील महिन्याची पहिली तारीख. मोबाईलची स्क्रीन उजळते आणि त्यावर संदेश येतो, “सॅलरी केडीटेड.” हा संदेश पाहताच चेहऱ्यावर
Read Moreकुमार कृष्णन भागलपुर को केवल गंगा, रेशम और विक्रमशिला से जानना अधूरा है। शहर से कुछ दूर नाथनगर का चंपापुर
Read Moreरंजीत विद्यार्थी महाभारत में द्रौपदी के अपमान का प्रसंग भारतीय स्मृति में केवल एक स्त्री के साथ हुए अन्याय की
Read Moreडॉ. शैलेश शुक्लादेश के सरकारी बैंकों में 26 से 30 सितंबर तक लगातार पाँच दिन शाखा सेवाएँ प्रभावित रहने की
Read Moreआर.सूर्य कुमारीभारतीय महिलाओं के सामने सबसे विकट समस्या तभी खड़ी हो जाती है जब वे जन्म लेती हैं। अशिक्षित माता-पिता
Read Moreविवेक रंजन श्रीवास्तवमाँ को पढ़ना दरअसल उस मौन को पढ़ना है जिसे वह जन्म से पहले से पल-पल कष्ट सहकर
Read Moreसुभाष आनंदपंजाब में विधानसभा चुनाव निकट हैं और सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो चले हैं। प्रदेश में सत्तारूढ़ आम आदमी
Read Moreसुधाकर आशावादी जब किसी के घर में आग की लपटें उठती हैं, पड़ोसी तब तक तमाशबीन बने रहते हैं, जब
Read Moreडॉ.सुधाकर आशावादीदेश में उच्च शिक्षा के नाम पर अनेक राजकीय और निजी विश्वविद्यालय स्थापित हैं। मंडल स्तर पर स्थापित राजकीय
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