
नियोजित शहरीकरण, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे को मिलेगी नई दिशा
मुंबई। नवी मुंबई से सटे क्षेत्र में विकसित की जा रही ‘तीसरी मुंबई’ यानी अटल बिहारी वाजपेयी शिवडी–न्हावा शेवा अटल सेतु (मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक) प्रभाव क्षेत्र के लिए नियुक्त नवनगर विकास प्राधिकरण तथा मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के माध्यम से लागू होने वाली भूमि अधिग्रहण और भूमि आवंटन की व्यापक नीति को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।इस नीति के तहत अटल सेतु प्रभाव क्षेत्र में नियोजित शहरीकरण, औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स हब, आवासीय-वाणिज्यिक परियोजनाओं और आधारभूत ढांचे के विकास को ठोस दिशा मिलेगी, जिससे ‘तीसरी मुंबई’ के विकास को गति मिलेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, महाराष्ट्र प्रादेशिक नियोजन व नगररचना अधिनियम, 1966 की धारा 126(1) के तहत आपसी सहमति से तय राशि पर समझौते के जरिए या 2013 के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम के अनुसार मुआवजा तय कर भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। इसके अलावा, धारा 126(10) के अंतर्गत नकद मुआवजे के बदले एफएसआई या ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) के माध्यम से भी भूमि अधिग्रहण की व्यवस्था की गई है। नीति के तहत 22.5 प्रतिशत भूमि वापसी योजना लागू की जाएगी। निजी स्वामित्व की भूमि के अधिग्रहण में परियोजना प्रभावितों को विकसित भूखंड देने की व्यवस्था रहेगी। यदि वापसी के तहत मिलने वाला भूखंड 40 वर्ग मीटर से कम होगा, तो नकद मुआवजा दिया जाएगा। अविकसित क्षेत्रों में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘पास-थ्रू पॉलिसी’ लागू की जाएगी, जिसके तहत भूमि अधिग्रहण और बुनियादी ढांचे के विकास की लागत भूखंडधारकों से वसूली जाएगी। एमएमआरडीए 15 प्रतिशत स्थापना शुल्क लेगा और पात्र परियोजनाओं को भूमि “जैसी है वैसी” आधार पर दी जाएगी। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने के लिए एमआईडीसी की नीति के अनुसार अटल सेतु प्रभाव क्षेत्र में एफडीआई लाने वाले उद्योगों को प्राथमिकता से भूखंड आवंटित किए जाएंगे। इसके तहत न्यूनतम 100 एकड़ भूमि लेना अनिवार्य होगा और चार वर्षों में प्रति 100 एकड़ कम से कम 250 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। सरकार ने भूमि विकास और साझेदारी के आधार पर विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से विकास केंद्र स्थापित करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने के भी निर्देश दिए हैं। एमएमआरडीए को विस्तृत भूमि आवंटन नियमावली और मजबूत राजस्व मॉडल तैयार कर सरकार को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले से ‘तीसरी मुंबई’ के विकास को गति मिलेगी और मुंबई महानगर क्षेत्र में औद्योगिक व शहरी विस्तार के लिए नए विकास केंद्र उभरेंगे।



