
मुंबई। मुंबई में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता और उसे नियंत्रित करने में नाकामी को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की खंडपीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सिविक बॉडी न तो प्रदूषण कम करने के लिए कोई ठोस इरादा दिखा रही है और न ही कोई प्रभावी योजना बना पाई है। अदालत ने कहा, “आप कुछ नहीं कर रहे हैं। आप न्यूनतम भी कुछ नहीं कर रहे। आपके पास न कोई इरादा है और न ही कोई प्लान। इससे साफ है कि आपने कोर्ट के आदेशों और नियमों को लागू करने को लेकर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया है।” हाई कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि बीएमसी के पास वायु प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की व्यापक शक्तियां हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन के लिए कोई प्रभावी प्रणाली विकसित नहीं की गई है। कोर्ट ने याद दिलाया कि बीएमसी के पास 38 बिंदुओं वाली गाइडलाइंस मौजूद हैं, लेकिन उन्हें सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा। जब बीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील एस.यू. कामदार ने दलील दी कि उल्लंघन करने वालों को शो-कॉज नोटिस और काम रोकने के नोटिस जारी किए गए हैं, तो कोर्ट ने व्यंग्य करते हुए कहा कि केवल नोटिस जारी करना कोई समाधान नहीं है। अदालत ने कहा कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि उल्लंघन होने ही न दिया जाए, न कि पहले उल्लंघन हो और बाद में नोटिस देकर कार्रवाई की जाए। बेंच ने निरंतर निगरानी की जरूरत पर भी जोर दिया। सुनवाई के दौरान बीएमसी ने अदालत को बताया कि मंगलवार को दिए गए निर्देशों के बाद उसकी 91 टीमों में से 39 विशेष टीमों ने दोपहर दो बजे के बाद 39 स्थानों का दौरा किया, जबकि शेष अधिकारी चुनाव ड्यूटी पर तैनात थे। इस पर कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि यदि अधिकारी चुनाव ड्यूटी पर थे तो बीएमसी को चुनाव आयोग से लिखित रूप में अनुरोध कर उन्हें इस अहम कार्य के लिए छूट मांगनी चाहिए थी, क्योंकि यह जनहित और जीवन से जुड़ा मामला है। इस पर याचिकाकर्ता एनजीओ ‘वनशक्ति’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास ने टिप्पणी की कि “जीने का अधिकार चुनाव ड्यूटी के अधीन नहीं हो सकता।” अदालत ने दोहराया कि बीएमसी अपनी व्यापक शक्तियों का उपयोग करने में पूरी तरह विफल रही है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल लागू की जा सकने वाली कोई ठोस योजना पेश नहीं कर सकी है। बीएमसी द्वारा स्पष्ट कार्ययोजना न देने पर नाराज़गी जताते हुए हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई उसी दिन शाम चार बजे दोबारा तय की और निर्देश दिया कि नागरिक निकाय अगले कुछ हफ्तों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत, प्रभावी और क्रियान्वयन योग्य योजना अदालत के समक्ष पेश करे।




