Sunday, April 12, 2026
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बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश: सहारा हॉस्पिटैलिटी को ₹23.89 करोड़ जमा करने का निर्देश, पानी सप्लाई बहाल करने को कहा

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सहारा हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड को चार हफ्तों के भीतर 23.89 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश देते हुए बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने यह भी कहा कि कंपनी द्वारा लिखित आश्वासन (undertaking) देने पर उसके होटल परिसर में पानी की आपूर्ति बहाल की जाए। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक श्रीनिवास चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने 8 अप्रैल को विले पार्ले (पूर्व) स्थित सहारा स्टार होटल संचालित करने वाली कंपनी को यह अंतरिम राहत दी। साथ ही, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा जारी पांच प्रॉपर्टी टैक्स मांग नोटिसों पर भी रोक लगा दी गई। कंपनी ने बीएमसी के नोटिसों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि यह “पिछली तारीख से पुनर्मूल्यांकन” (retrospective reassessment) के आधार पर की गई मनमानी कार्रवाई है। वहीं, बीएमसी ने अदालत में दलील दी कि प्रॉपर्टी के निरीक्षण के दौरान अवैध निर्माण पाए गए, जिसके बाद ही ये नोटिस जारी किए गए थे। निगम ने यह भी बताया कि एक विशेष नोटिस भेजा गया था, जिसका कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। सहारा हॉस्पिटैलिटी की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि पानी की सप्लाई काटना कंपनी के लिए “सिविल डेथ” के समान है और इससे उसके व्यापार करने के अधिकार का हनन होता है। कंपनी ने यह भी कहा कि 2001 से कथित बकाया राशि को “अस्थायी मूल्यांकन” के नाम पर 2026 में पहली बार उठाया गया है, जो अनुचित है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की वित्तीय स्थिति का भी संज्ञान लिया और पाया कि सहारा हॉस्पिटैलिटी हाल ही में परिसमापन प्रक्रिया और कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से बाहर निकली है। इस आधार पर अदालत ने कंपनी को चार सप्ताह में राशि हाई कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही, बीएमसी को इस मामले में अपना जवाब (हलफनामा) दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की है।

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