
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी बिगुल फूंका। उन्होंने शिवसैनिकों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, बीएमसी चुनाव जीतना ही है और उम्मीदवारी मिले या न मिले, पार्टी का एकमात्र लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराना होना चाहिए। शिवसेना भवन में महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान कोविड काल में की गई जनसेवा पर आधारित पुस्तिका के विमोचन के बाद उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जब भाजपा को कोई नहीं जानता था, तब शिवसेना ने उन्हें गांव-गांव तक पहुंचाया, लेकिन आज वही लोग शिवसेना पर वार कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि मुंबई पर वर्षों से शिवसेना का शासन रहा है और कोई भी ताकत इसे उनसे छीन नहीं सकी और न ही आगे छीन सकेगी। मराठा अस्मिता पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि मराठियों को पराक्रम सिखाने की जरूरत नहीं है। इस अवसर पर सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई, अनिल परब, मिलिंद नार्वेकर और पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। उद्धव ठाकरे ने अपने भाई राज ठाकरे (मनसे) के साथ गठबंधन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह फैसला महाराष्ट्र और मराठी मानूस के हित में है और गठबंधन में सब कुछ मनमाफिक नहीं होता, इसलिए कुछ सीटें सहयोगियों के लिए छोड़नी पड़ती हैं। उन्होंने ‘मुझे ही टिकट चाहिए’ की जिद छोड़कर महाराष्ट्र की रक्षा की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए बिना निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि शहीदों की शहादत से मिली मुंबई को “दो गुजराती लोग” निगलना चाहते हैं और भाजपा ने केवल गठबंधन नहीं तोड़ा, बल्कि शिवसेना को खत्म करने की कोशिश की है। अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं में उलझी रही, तो विरोधी इसका फायदा उठाएंगे, इसलिए सभी को एकजुट होकर लड़ना होगा।



