
ठाणे। ठाणे में शनिवार को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचार—“हक़ भीख मांगकर नहीं, बल्कि संघर्ष से मिलते हैं”—को केंद्र में रखते हुए कलेक्टर कार्यालय पर सामाजिक समता आंदोलन के तहत निषेध प्रदर्शन किया गया। इस आंदोलन में ओबीसी, दलित, आदिवासी और भटके-विमुक्त समाज के विभिन्न संगठनों ने भाग लिया और शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ते जातीय भेदभाव के खिलाफ सशक्त यूजीसी रेग्युलेशन 2026 लागू करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने रोहित वेमुला, पायल तडवी और दर्शन सोलंकी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त असमानता और सामाजिक अन्याय को उजागर किया है। आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों में ‘रोहित वेमुला कानून’ लागू करने, जातिवार जनगणना कराने, जनसंख्या के आधार पर आरक्षण सुनिश्चित करने, नई शिक्षा नीति को रद्द करने, आरक्षण बैकलॉग को भरने और ठेका प्रणाली समाप्त करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसके साथ ही नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा का नाम दि.बा. पाटील के नाम पर रखने की भी मांग की गई। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस आंदोलन को सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई बताते हुए व्यापक एकजुटता का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक शिक्षा संस्थानों में समानता और सम्मान सुनिश्चित नहीं होता, तब तक इस तरह के आंदोलन जारी रहेंगे।




