
मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने उच्चतम न्यायालय द्वारा अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा को लेकर 20 नवंबर के अपने आदेश पर स्थगन लगाए जाने के फैसले का सोमवार को स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह राहत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे स्थायी बनाने की आवश्यकता है। आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- अरावली पर्वतमाला के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय का स्थगन आदेश बड़ी राहत है, लेकिन अस्थायी है। इसे स्थायी मुहर दी जानी चाहिए। साथ ही, लोगों को अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा के संबंध में फैलायी जा रही गलत जानकारी के झांसे में नहीं आने देना चाहिए। उच्चतम न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समिति द्वारा सुझाई गई अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला की समान परिभाषा को स्थगित रखा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस मुद्दे की व्यापक समीक्षा के लिए क्षेत्र विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा है। आदित्य ठाकरे ने राजस्थान में हुए जनआंदोलनों का हवाला देते हुए कहा- जन आंदोलन बिना यह परिणाम संभव नहीं था। यह दर्शाता है कि ग्रह की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, न कि उसके संसाधनों का शोषण करने की इच्छा रखने वालों के इरादे।” उन्होंने आशा जताई कि अरावली पर्वतमाला सहित पूरे देश में प्रकृति को मजबूत सुरक्षा दी जा सकेगी। मंत्रालय की समिति ने अनुशंसा की थी कि ‘अरावली पहाड़ी’ की परिभाषा ऐसी भू-आकृति हो जिसकी ऊँचाई स्थानीय भू-स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक हो, और ‘अरावली पर्वतमाला’ दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह हो जो एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर हों। पर्यावरण कार्यकर्ताओं, वैज्ञानिकों और विपक्षी दलों ने चेतावनी दी थी कि इस पुनर्परिभाषा से अरावली के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में खनन की अनुमति मिल सकती है।



