
मुंबई। महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और अब खेती वास्तव में महिलाओं के नेतृत्व में एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। महिला किसानों को उनके अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और उनके सशक्तिकरण के लिए आगामी विधानसभा सत्र में एक विशेष विधेयक पेश किया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी राज्य स्तरीय ‘जेंडर रिसोर्स सेंटर’ स्थापित किया जाएगा, जिससे महिला किसानों से जुड़े विभिन्न कृषि संबंधी मुद्दों के समाधान में मदद मिलेगी। यह विश्वास उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने व्यक्त किया। बुधवार को विधानभवन के केंद्रीय सभागार में अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 तथा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र विधानमंडल के संयुक्त तत्वावधान में महिला किसानों का सशक्तिकरण विषय पर सर्वदलीय महिला विधायकों और विशेषज्ञों की भागीदारी से विशेष चर्चा सत्र आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में बोलते हुए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने महिला किसानों के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और आगामी कदमों की जानकारी दी। इस अवसर पर विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष एड. राहुल नार्वेकर, विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोरे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे, महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे, कृषि राज्य मंत्री एड. आशीष जयस्वाल, विधायक मोनिका काजले, मंजुला गावित, ज्योति गायकवाड़, कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव विकासचंद्र रस्तोगी, विधानमंडल सचिवालय के सचिव जितेंद्र भोले, तथा एम. एस. स्वामीनाथन फाउंडेशन की संस्थापक सौम्या स्वामीनाथन और सह-संस्थापक नित्या राव सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि महिला किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए लाए जाने वाले नए कानून में मुख्य रूप से सातबारा (7/12) दस्तावेज में महिलाओं का नाम न होने से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को दूर करने तथा कृषि से जुड़े सांख्यिकीय आंकड़ों में महिला और पुरुष किसानों का अलग-अलग रिकॉर्ड रखने जैसे प्रावधान शामिल किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीक का उपयोग कर खेती को अधिक प्रभावी बना सकें। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि विभाग की सभी योजनाओं में कम से कम 30 प्रतिशत लाभ महिलाओं के लिए आरक्षित रखा गया है और पीएम-किसान योजना का लाभ लगभग 18 लाख महिला किसानों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ‘लखपति दीदी’ और ‘शी मार्ट्स’ जैसे उपक्रमों के माध्यम से महिलाओं को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे कृषि पूरक व्यवसायों के लिए महिलाओं को विशेष अनुदान देने पर भी विचार किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में करीब 45 प्रतिशत छात्राएं हैं, जो इस बात का संकेत है कि महिलाएं अब केवल खेती तक सीमित नहीं हैं बल्कि कृषि उद्यमिता और तकनीक आधारित खेती की ओर भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होंगी, तभी राज्य की अर्थव्यवस्था वास्तव में मजबूत बनेगी। इस चर्चा सत्र में विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोरे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से पुरुषों के रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन के कारण गांवों में खेती की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं पर आ जाती है। कई अध्ययनों के अनुसार कृषि क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत योगदान महिलाओं का है, लेकिन भूमि के दस्तावेजों में उनका नाम न होने से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को ध्यान में रखते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक का समर्थन देने पर विशेष ध्यान दे रही है। पिछले वर्ष अहिल्यानगर जिले में 15 हजार महिलाओं को खेती के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री प्रदान की गई थी और इस पहल की सफलता को देखते हुए इस प्रकार के कार्यक्रमों को राज्यभर में लागू करने की योजना है। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि देश में 81 प्रतिशत से अधिक महिलाएं सीधे तौर पर खेती के कार्य में लगी हुई हैं। इसलिए महिलाओं को केवल ‘गृहिणी’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें कृषि क्षेत्र की वास्तविक उद्यमी के रूप में पहचान मिलनी चाहिए। ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन, कुक्कुट पालन, रेशम उद्योग और मधुमक्खी पालन जैसे व्यवसायों में अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की नित्या राव ने महिला किसानों के लिए विशेष ‘कृषि विकास निधि’ स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और आर्थिक चुनौतियों के कारण पुरुषों का शहरों की ओर पलायन बढ़ रहा है, ऐसे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती का भार बड़ी संख्या में महिलाएं संभाल रही हैं। इसलिए जमीन की मालिक न होने पर भी खेती करने वाली महिलाओं को ‘महिला किसान प्रमाणपत्र’ दिया जाना चाहिए, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभिन्न क्षेत्रों की महिला किसानों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम का प्रस्तावना मोनिका काजले ने किया, जबकि संचालन निलेश मदाने ने किया। इस कार्यक्रम में मंत्री, विधायक, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में अन्य गणमान्य उपस्थित थे।




