
मुंबई। जैसे-जैसे बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे शिवसेना (यूबीटी) को राजनीतिक झटकों का सिलसिला थमता नज़र नहीं आ रहा है। हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के गठबंधन के एलान के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और टूट की चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। इसी कड़ी में बांद्रा पूर्व विधानसभा क्षेत्र से एक बड़ी और अहम राजनीतिक खबर सामने आई है, जो शिवसेना (यूबीटी) के लिए चुनावी दृष्टि से नुकसानदेह मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के डॉक्टर सेल के अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद जाजू कल पार्टी को अलविदा कहकर शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. जाजू केवल अकेले नहीं, बल्कि सैकड़ों डॉक्टरों के साथ कल सांताक्रुज़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थामेंगे। बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद श्रीकांत शिंदे से हालिया मुलाकात के बाद ही डॉ. जाजू ने शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने का अंतिम निर्णय लिया। डॉ. विवेकानंद जाजू ने पार्टी छोड़ने को लेकर कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ नेताओं की कार्यशैली से वे संतुष्ट नहीं थे। उनके अनुसार, संगठन में ज़मीनी स्तर पर काम करने वालों की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था, जिससे लगातार असहजता बढ़ रही थी। इसी कारण उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) से अलग होने का निर्णय लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े इतने बड़े संगठनात्मक चेहरे और डॉक्टरों का शिंदे गुट में शामिल होना बीएमसी चुनाव के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है। इसका सीधा लाभ शिवसेना (शिंदे गुट) को मिल सकता है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह झटका केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि भरोसे और ज़मीनी पकड़ से जुड़ा हुआ भी है। बीएमसी चुनाव से ठीक पहले इस तरह की टूट यह संकेत देती है कि मुंबई में उद्धव ठाकरे गुट की राह आसान नहीं रहने वाली है और आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।




