Thursday, January 15, 2026
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फर्जी नौकरी और जाली दस्तावेज़ों के सहारे 2.72 करोड़ का होम लोन फ्रॉड, आईसीआईसीआई बैंक की शिकायत पर छह के खिलाफ केस दर्ज

मुंबई। मुंबई के एक बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक से जुड़े होम लोन घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। नकली नौकरी की डिटेल्स, जाली सैलरी सर्टिफिकेट और फर्जी बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए 2.72 करोड़ रुपए का होम लोन हासिल करने के आरोप में पंत नगर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, यह शिकायत आईसीआईसीआई बैंक के होम लोन विभाग के रीजनल हेड (सेल्स) जोसेफ डेविड नाडर ने दर्ज कराई है। आरोपियों में संदीप यादव, बैका पांडुरंग बागड़ी, दीपक पवार, रेखा जाधव, अमन शर्मा और वर्सेटाइल वैली नामक एक बिल्डर शामिल हैं। शिकायत में बताया गया है कि जनवरी 2020 से नवंबर 2022 के बीच बैंक की घाटकोपर ईस्ट शाखा से पांच ग्राहकों को कुल 2.79 करोड़ रुपए के होम लोन मंजूर किए गए थे। इनमें से एक कर्जदार ने पूरा लोन चुका दिया, जबकि चार अन्य ने भुगतान बंद कर दिया, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। बैंक की आंतरिक जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी संदीप यादव ने खुद को कई कंपनियों का मालिक बताया और चारों कर्जदारों को अपनी फर्मों का कर्मचारी दर्शाया। जांच में यह भी पता चला कि जिन कंपनियों के नाम पर नौकरी और सैलरी दिखाई गई थी, वे या तो बंद हो चुकी थीं या अस्तित्व में ही नहीं थीं। एक कर्जदार रेखा विजय जाधव की इस दौरान मृत्यु हो चुकी है। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि लोन मंजूरी से पहले कर्जदारों के खातों में कथित सैलरी के नाम पर रकम जमा कराई गई, जिसे उसी दिन या कुछ समय बाद दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इसका उद्देश्य नियमित आय और स्थायी नौकरी का भ्रम पैदा करना था। इसी तरह, फ्लैट बुकिंग के लिए दी गई टोकन राशि को सर्कुलर ट्रांजैक्शन के जरिए बिल्डर के खातों में वापस भेजा गया, ताकि सौदे को वास्तविक दिखाया जा सके। चारों कर्जदारों ने ठाणे और डोंबिवली के रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स में फ्लैट खरीदे थे, जिनके लिए कुल 2.72 करोड़ रुपए का लोन लिया गया। डिफॉल्ट के बाद बैंक ने कानूनी कार्रवाई करते हुए संबंधित सभी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया है। पंत नगर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बैंक डॉक्यूमेंट्स, केवाईसी पेपर्स, ट्रांजैक्शन डिटेल्स और बिल्डर की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी रैकेट की आशंका जताई गई है। मामले की आगे की जांच जारी है।

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