
ठाणे। ठाणे से सटे भिवंडी क्षेत्र के काल्हेर ग्राम स्थित संजीवनी कॉम्प्लेक्स में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य एवं धार्मिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह सात दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम 7 दिसंबर से 13 दिसंबर 2025 तक चला, जबकि 14 दिसंबर को पूर्णाहुति हवन एवं विशाल भंडारे के साथ कथा का विधिवत विश्राम किया गया। आयोजन में काल्हेर सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा का आनंद लिया और धर्मलाभ प्राप्त किया। कथा के दौरान वृंदावन धाम से पधारे कथाव्यास पूज्य श्री आचार्य स्वप्निल (ऋषि) महाराज जी ने श्रीमद् भागवत के प्रमुख एवं प्रेरणादायी प्रसंगों का अत्यंत सरल, भावपूर्ण और प्रभावशाली शैली में वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाएं, भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति, ध्रुव चरित्र, रुक्मिणी विवाह तथा गोवर्धन पूजा जैसे प्रसंगों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा स्थल पर हर दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बना रहा। कथा के प्रथम दिवस भव्य कलश शोभा यात्रा का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत काल्हेर के सम्माननीय व्यक्तित्व एवं भाजपा युवा मोर्चा के ठाणे जिला ग्रामीण अध्यक्ष श्रीधर जयवंत पाटिल द्वारा नारियल फोड़कर की गई। इस शोभायात्रा में काल्हेर की शान, उत्तर भारतीय हृदय सम्राट सुजीत मधुकर पाटिल (तात्या सेठ) सहित अनेक समाजसेवी और उद्योगपति राकेश पाटिल ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। कथा के दौरान कई गणमान्य अतिथियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें भाजपा युवा मोर्चा ठाणे जिला ग्रामीण अध्यक्ष श्रीधर जयवंत पाटिल, काल्हेर सरपंच अश्लेषा पंकज तरे, पंकज तरे, धर्मवीर माथाडी अध्यक्ष, युवा नेतृत्व सुजीत मधुकर पाटिल (तात्या सेठ), पूर्व सरपंच पुंडलिक भोकरे (काका), पूर्व सरपंच छत्रपति पाटिल, पूर्व सरपंच स्नेहा देवेंद्र पाटिल, देवेंद्र पाटिल, पूर्व सरपंच विनोद मुकादम, पूर्व सरपंच एडवोकेट समीर पाटिल, समाजसेवक राकेश पाटिल और समाजसेवक धनंजय चौधरी सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल रहे और कथाव्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में मुख्य आयोजक श्री लड्डू गोपाल (ठाकुरजी स्वयं) के साथ आयोजक टीम के चंद्रेश चौधरी, मुन्ना चौधरी, ओमकार निर्मल, रविशंकर मिश्रा तथा संयोजक टीम उत्तर भारतीय सकल हिंदू समाज, संजीवनी परिवार और काल्हेर ग्रामस्थ मंडल का विशेष योगदान रहा। आयोजन की सफलता के बाद पूरे क्षेत्र में धार्मिक, सांस्कृतिक और सकारात्मक वातावरण बना रहा, जिसे श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण अनुभव बताया।




