गोकुळ पर कब्जा करने का सरकार का कोई इरादा नहीं: मुख्यमंत्री फडणवीस

अध्यक्ष चुनाव में कोरम का पेच, दोनों गुट मिलकर निकालें रास्ता, नामांकन की नौबत टालने की अपील

मुंबई। कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुळ) के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आवश्यक कोरम पूरा नहीं होने के कारण अध्यक्ष का चुनाव अटका हुआ है। इस बीच, सरकार द्वारा सदस्यों को नामित कर गोकुळ पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश किए जाने के आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का संस्था पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों गुट आपस में बैठकर समाधान निकालते हैं, तो सदस्यों के नामांकन की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। यह पूरी तरह वैधानिक मामला है और इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
अध्यक्ष चुनाव में आखिर क्या है पेच?
गोकुळ के चुनाव के बाद दोनों गुटों में से किसी के पास भी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए आवश्यक कोरम पूरा करने जितने मत नहीं हैं। ऐसे में यदि कोई एक गुट बैठक में उपस्थित नहीं होता है या बहिष्कार करता है, तो अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाता। बैठक की तारीख निर्धारित होने के बावजूद एक गुट के सदस्य अनुपस्थित रहे, जिससे चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार, अदालत ने 10 तारीख को बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया था। हालांकि, अदालत ने यह नहीं कहा था कि कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में कोरम के बिना ही चुनाव कराया जाए। इसलिए दोबारा चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
तीन बार बैठक विफल होने पर DDR के पास जाएंगे अधिकार
गोकुळ की कानूनी व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि लगातार तीन बार बैठक नहीं हो पाती है, तो संस्था के अधिकार जिला उपनिबंधक (DDR) के पास चले जाते हैं। इसके बाद निर्वाचित सदस्यों के पास ये अधिकार नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि बार-बार कोरम के अभाव में बैठक स्थगित होने की स्थिति में अंततः संस्था के अधिकार सरकार के पास जाने की परिस्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में जिला उपनिबंधक के माध्यम से आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरम पूरा करने के उद्देश्य से कुछ सदस्यों को नामित करने का अधिकार देने वाला कानून बनाया गया है। दोनों गुटों के पास अध्यक्ष चुनाव के लिए पर्याप्त मत नहीं होने के कारण यह वैधानिक पेच उत्पन्न हुआ है।
‘गोकुळ पर कब्जा करने में सरकार की कोई रुचि नहीं’
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि गोकुळ पर राज्य सरकार कब्जा करना चाहती है, ऐसी धारणा गलत है। उन्होंने कहा कि गोकुळ का चुनाव लगभग पांच हजार मतदाताओं और एक जिले के कुछ तालुकों तक सीमित है। राज्य सरकार को इस चुनाव में विशेष रुचि नहीं है और न ही उसे इस तरह का कोई कदम उठाने की आवश्यकता है।
दोनों गुट मिलकर निकालें समाधान
फडणवीस ने दोनों गुटों से आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्ष एक साथ बैठकर निर्णय लेते हैं और कोई वैधानिक अड़चन नहीं आती, तो सरकार को किसी भी सदस्य को नामित करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की भूमिका केवल वैधानिक जिम्मेदारी निभाने तक सीमित है। दोनों गुटों के बीच सहमति बनने पर सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी।राज्य की राजनीति पर चुनाव का कोई प्रभाव नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोकुळ एक अच्छी और महत्वपूर्ण संस्था है, लेकिन इसके चुनाव का राज्य की राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सरकार को इस चुनाव में विशेष रुचि नहीं है। इसलिए इस मामले को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। फडणवीस ने दोहराया कि दोनों गुट आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकालें। यदि वैधानिक पेच दूर हो जाता है, तो सरकार की ओर से किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं रहेगी।

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