विकसित महाराष्ट्र के लिए प्रशासन में AI और आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करें अधिकारी: मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल

पुणे। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने अधिकारियों से विकसित महाराष्ट्र के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रशासन में जनोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया। गुरुवार को पुणे स्थित यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन प्रबोधिनी (यशदा) में पांच से छह वर्ष का प्रशासनिक अनुभव रखने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और जिला नियोजन अधिकारियों के लिए आयोजित एक दिवसीय ‘गवर्नेंस 2030’ कार्यशाला में उन्होंने पूरे दिन उपस्थित रहकर अधिकारियों से संवाद किया। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासनिक कार्यों को अधिक गतिशील, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के साथ अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्रीय दौरे करने चाहिए। विकास कार्यों की गुणवत्ता का निरीक्षण करने और नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित करने पर भी उन्होंने जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि क्षेत्रीय स्तर पर यह समीक्षा की जाए कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है या नहीं। जिला नियोजन अधिकारियों को गांवों का दौरा कर स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन करने की सलाह दी गई, ताकि जिला नियोजन अधिक वास्तविक और परिणामोन्मुखी बनाया जा सके। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी ने सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जिला स्तर पर नियोजन, प्राथमिकताओं के निर्धारण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि नीति आयोग द्वारा चयनित 27 तालुकों के साथ राज्य सरकार ने अतिरिक्त 150 तालुकों को शामिल किया है। इस प्रकार कुल 177 तालुकों में आकांक्षी तालुका कार्यक्रम लागू किया जाएगा। उन्होंने कार्यक्रम की प्रगति के आकलन, नियमित समीक्षा और इसके लिए विकसित किए जा रहे स्वतंत्र पोर्टल की जानकारी भी दी। कार्यशाला में विकसित महाराष्ट्र के विजन, सतत विकास लक्ष्यों के जिला स्तर पर क्रियान्वयन और आकांक्षी तालुका कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई। तकनीक के उपयोग और क्षेत्रीय अनुभवों के समन्वय के जरिए प्रशासन को अधिक संवेदनशील, सक्षम और जनकेंद्रित बनाने पर विशेष जोर दिया गया। यशदा के महानिदेशक डॉ. सुहास दिवसे ने प्रस्तावना एवं स्वागत किया। उपमहानिदेशक डॉ. मल्लिनाथ कलशेट्टी ने आभार व्यक्त किया, जबकि सहायक प्राध्यापक सीमा जगताप ने कार्यक्रम का संचालन किया।
