ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए व्यापक विकास योजना तैयार करें: राज्यपाल
‘ग्रामोद्योग भरारी’ पुरस्कार समारोह में जिष्णु देव वर्मा का आह्वान, अगले वर्ष से पुरस्कार राशि दोगुनी करने की उद्योग मंत्री उदय सामंत की घोषणा

मुंबई। ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक कौशल, प्राकृतिक संसाधनों और उद्यमशीलता का प्रभावी उपयोग कर रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल एक व्यापक विकास योजना तैयार करे। यह योजना ‘विकसित भारत 2047’ की संकल्पना के अनुरूप होनी चाहिए। यह सुझाव महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने दिया। मंगलवार को लोकभवन में महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल की ओर से आयोजित ‘ग्रामोद्योग भरारी’ पुरस्कार समारोह में राज्यपाल ने विभिन्न जिलों के सफल ग्रामोद्योग उद्यमियों को सम्मानित किया। उन्होंने ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए मंडल के कार्यों की सराहना करते हुए पुरस्कार प्राप्त उद्यमियों को बधाई दी।
राज्यपाल ने कहा कि ग्रामीण उद्यमियों को पारंपरिक कौशल के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हो सकें। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम विश्वकर्मा योजना और मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं के माध्यम से नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
‘मधाचे गाव’ योजना की सराहना
राज्यपाल ने मंडल के ‘मधाचे गाव’ यानी ‘शहद गांव’ उपक्रम की विशेष सराहना की। महागांव और कडगांव की तर्ज पर राज्य के अन्य 10 गांवों को ‘शहद गांव’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने 5 करोड़ 2 लाख रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन से किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस पहल के विस्तार के लिए वैज्ञानिक प्रशिक्षण, शहद प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
अगले वर्ष से पुरस्कार राशि होगी दोगुनी
समारोह में उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत ने घोषणा की कि खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र के उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए अगले वर्ष से ‘ग्रामोद्योग भरारी पुरस्कार’ की नकद पुरस्कार राशि दोगुनी की जाएगी। डॉ. सामंत ने कहा कि केवल पांच लाख रुपये का कर्ज लेकर दो से तीन वर्षों में 25 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा करने वाले उद्यमी की सफलता प्रेरणादायक है। ऐसे सफल उद्यमियों को खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का ब्रांड एंबेसडर बनाया जाना चाहिए, ताकि अन्य लोगों को भी उद्यम शुरू करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान देने की प्रेरणा मिले।
