एमएलसी चुनाव: भाजपा के ‘शून्य’ वाले दावे को पछाड़ते हुए कांग्रेस ने खोला खाता

नई दिल्ली/मुंबई। देश के चार प्रमुख राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। जहाँ एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) 13 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, वहीं राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस की उस एक सीट की हो रही है, जिसने भाजपा के ‘क्लीन स्वीप’ और कांग्रेस को ‘शून्य’ पर समेटने के दावों की हवा निकाल दी है। इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि वोटिंग बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए हुई थी। ईवीएम (EVM) के दौर में मतपत्रों से हुए इस चुनाव के नतीजों ने कई विपक्षी दलों के चेहरों पर खुशी ला दी है। हालांकि, विधान परिषद (एमएलसी) के चुनाव हमेशा से ही बैलेट पेपर पर होते रहे है।
संघ के गढ़ में कांग्रेस का ‘पंजा’, ढह गया भाजपा का दावा
चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी विपक्षी खेमे को पूरी तरह साफ करने और कांग्रेस को शून्य (0) पर रोकने का दावा कर रही थी। कर्नाटक जैसे राज्य में, जहाँ कांग्रेस की सरकार है, वहाँ भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने सभी 4 सीटें जीतकर कांग्रेस का सूपड़ा साफ भी कर दिया। लेकिन, असली उलटफेर महाराष्ट्र में देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह क्षेत्र नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। कई दशकों से भाजपा का अभेद्य किला मानी जाने वाली इस सीट पर कांग्रेस ने न सिर्फ अपना खाता खोला, बल्कि भाजपा के अहंकार को भी तगड़ी चोट पहुंचाई।
बैलेट पेपर से हुए चुनाव ने विपक्षी खेमे में भरी ‘खुशी’
बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों के नतीजों ने विपक्षी दलों (महा विकास अघाड़ी और इंडिया गठबंधन) को जश्न मनाने का बड़ा मौका दे दिया है। विपक्ष का मानना है कि मतपत्रों से होने वाले चुनाव जनता की असली राय को सामने लाते हैं।
उत्तर प्रदेश में सपा का जलवा: अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (SP) ने भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए 5 सीटों पर कब्ज़ा जमाया। सपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की स्नातक और शिक्षक दोनों सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिसने लखनऊ से दिल्ली तक हलचल मचा दी है।
महाराष्ट्र में MVA मजबूत: महाराष्ट्र की 5 सीटों में से विपक्ष के महा विकास अघाड़ी (MVA) ने 3 सीटों (NCP-शरद पवार 2, कांग्रेस 1) पर जीत हासिल कर सत्ताधारी महायुति गठबंधन को पीछे छोड़ दिया।
बिहार में भी विपक्ष की धमक: बिहार की 8 सीटों में से लालू प्रसाद यादव की आरजेडी (RJD) ने 2 महत्वपूर्ण सीटें जीतकर अपनी ताकत का अहसास कराया। वहीं पहली बार चुनाव लड़ रही प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी एक सीट जीतकर इतिहास रचा। हालांकि, कुल सीटों के मामले में भाजपा 13 सीटें जीतकर आगे रही और एनडीए (NDA) गठबंधन ने 16 सीटों पर कब्ज़ा किया। लेकिन उत्तर प्रदेश में सपा की 5 सीटें, महाराष्ट्र और बिहार में विपक्ष का मजबूत प्रदर्शन, और सबसे बढ़कर नागपुर में कांग्रेस द्वारा भाजपा के ‘शून्य’ के दावे को ध्वस्त करना—इस बैलेट पेपर चुनाव की सबसे बड़ी सुर्खी बन गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह नतीजा आने वाले विधानसभा और आम चुनावों के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा।
