‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर सेवानिवृत्त आयकर अधिकारी से 10 लाख रुपये की ठगी

खुद को पुलिस और आईपीएस अधिकारी बताकर पांच दिन तक वीडियो कॉल पर की पूछताछ, आरबीआई की फर्जी जांच के नाम पर ट्रांसफर कराए पैसे

मुंबई। साइबर ठगों ने 57 वर्षीय सेवानिवृत्त वरिष्ठ आयकर अधिकारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर कथित तौर पर 10 लाख रुपये की ठगी कर ली। नागपुर निवासी पीड़ित ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, ठगों ने खुद को पुलिस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के रूप में पेश किया और कई दिनों तक उन्हें मानसिक दबाव में रखकर पैसे ट्रांसफर करवाए। पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें ठगी की रकम भेजी गई थी।
मुंबई पुलिस मुख्यालय से फोन आने का किया दावा
पुलिस के मुताबिक, कथित धोखाधड़ी की शुरुआत 1 अक्टूबर को हुई, जब पीड़ित के पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम केशव जाधव बताया और दावा किया कि वह मुंबई पुलिस मुख्यालय से बात कर रहा है।
आरोप है कि ठग ने पीड़ित को बताया कि उनके नाम पर पंजीकृत एक व्हाट्सएप अकाउंट का इस्तेमाल अवैध विज्ञापन प्रसारित करने के लिए किया जा रहा है। इसके बाद कॉल को उसके एक साथी के पास स्थानांतरित कर दिया गया, जिसने खुद को पुलिस जांच अधिकारी बताया।
आतंकी हमले से जोड़कर जेल भेजने की धमकी
शिकायत के अनुसार, ठगों ने दावा किया कि कश्मीर में सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाकर किए गए एक आतंकी हमले के घटनास्थल से पीड़ित के पहचान संबंधी दस्तावेज मिले हैं। इस कथित मामले की गंभीरता का हवाला देकर उन्हें तत्काल जेल भेजने की धमकी दी गई। इसके बाद पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने का डर दिखाया गया। उन्हें एक होटल के कमरे में अकेले रहने और अपने मोबाइल फोन का वीडियो कैमरा लगातार चालू रखने का निर्देश दिया गया। ठगों ने कथित तौर पर कहा कि कैमरे के जरिए उनकी निगरानी की जाएगी।
पांच दिन तक वीडियो कॉल पर पूछताछ
पीड़ित के अनुसार, 2 से 6 अक्टूबर के बीच एक व्यक्ति ने खुद को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर रोज वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे पूछताछ की। ठगों ने दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आदेश पर उनके वित्तीय खातों की जांच की जा रही है। साथ ही, उनके बैंक खातों को करोड़ों रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ने का आरोप लगाया गया। लगातार धमकियों और दबाव के बीच पीड़ित ने अपनी 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वा दी। आरोप है कि ठगों ने इसे आरबीआई की ‘सिक्योरिटी क्लीयरेंस वेरिफिकेशन’ प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
कॉर्पोरेट खाते में आरटीजीएस से भेजे 10 लाख रुपये
शिकायत के मुताबिक, 8 अक्टूबर को पीड़ित ने अपने बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिए एक कॉर्पोरेट खाते में 10 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जब ठगों ने उनसे संपर्क करना बंद कर दिया, तब उन्हें अपने साथ धोखाधड़ी होने का एहसास हुआ। पीड़ित ने साइबर पुलिस से संपर्क कर कथित लेनदेन का विवरण दिया। पुलिस अब उस खाते और अन्य संभावित ‘म्यूल अकाउंट्स’ की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने या आगे भेजने के लिए किया गया हो सकता है। जांच के जरिए रकम का पता लगाने और इस मामले में शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *