भगवती अस्पताल को PPP मॉडल पर चलाएगी BMC, 50% बेड महानगरपालिका मरीजों के लिए आरक्षित

490 बेड के मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल में 90 ICU बेड, निजी भागीदार को करना होगा कम से कम 150 करोड़ रुपये का निवेश

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने बोरीवली पश्चिम स्थित श्री हरिलाल भगवती अस्पताल का पुनर्विकास कर 490 बेड का आधुनिक मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल तैयार किया है। इसमें 90 ICU बेड सहित अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अस्पताल को अगले 30 वर्षों के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर संचालित करने के लिए महानगरपालिका ने निविदा प्रक्रिया शुरू की है। BMC प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि PPP व्यवस्था अस्पताल का निजीकरण नहीं है। जमीन और अस्पताल की इमारत का 100 प्रतिशत मालिकाना हक महानगरपालिका के पास ही रहेगा, जबकि चयनित निजी भागीदार निर्धारित अवधि के लिए केवल अस्पताल का संचालन करेगा। अस्पताल परिसर में मराठी भाषा में स्पष्ट रूप से यह दर्शाने वाला बोर्ड लगाना भी अनिवार्य होगा कि संपत्ति मुंबई महानगरपालिका के स्वामित्व में है।
50 प्रतिशत बेड BMC और सरकारी योजनाओं के मरीजों के लिए
प्रस्ताव के अनुसार अस्पताल के कम से कम 50 प्रतिशत बेड महानगरपालिका के मरीजों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों के लिए आरक्षित रहेंगे। इनमें महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं शामिल होंगी। BMC का कहना है कि महानगरपालिका और निजी मरीजों को उपचार की गुणवत्ता में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा। आरक्षित बेड की उपलब्धता की जानकारी मुख्य रिसेप्शन के पास डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर रियल टाइम में प्रदर्शित की जाएगी।
इलाज के शुल्क पर रहेगा नियंत्रण
निजी ऑपरेटर को मनमाने शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी। महानगरपालिका ने हॉस्पिटल सर्विस रेट (HSR) के तहत उपचार शुल्क की अधिकतम सीमा तय करने का प्रावधान किया है। प्रस्ताव के अनुसार सामान्य OPD शुल्क 10 रुपये, स्पेशालिटी OPD शुल्क 293 रुपये और बड़ी सर्जरी के लिए ऑपरेशन थिएटर शुल्क अधिकतम 1,200 रुपये निर्धारित किया गया है। प्रशासन का दावा है कि ये दरें CGHS, MJPJAY और महानगरपालिका की निर्धारित दरों के बराबर या उससे कम रखी जाएंगी।
निजी भागीदार करेगा 150 करोड़ रुपये का निवेश
अस्पताल संचालन के लिए चयनित संस्था को कम से कम 150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। इस राशि से चिकित्सा उपकरण, बेड, फर्नीचर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। BMC के अनुसार इसके जरिए अस्पताल में कैथ लैब, MRI, CT स्कैन और नौ आधुनिक ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी और उपकरणों पर होने वाला बड़ा पूंजीगत खर्च निजी ऑपरेटर वहन करेगा।BMC को हर साल 6.56 करोड़ रुपये लीज रेंट
निजी ऑपरेटर को महानगरपालिका को प्रतिवर्ष कम से कम 6.56 करोड़ रुपये लीज रेंट अग्रिम देना होगा। इसमें प्रत्येक 10 वर्ष बाद 10 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान रखा गया है। BMC के अनुसार निविदा में केवल कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्था या सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट ही भाग ले सकेंगे। संस्था को सामाजिक क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। साथ ही पिछले पांच वर्षों में उसका औसत वार्षिक चैरिटी खर्च कम से कम 100 करोड़ रुपये होना आवश्यक रखा गया है।
अस्पताल में BMC का OSD रखेगा निगरानी
अस्पताल पर महानगरपालिका का प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए महानगरपालिका आयुक्त की ओर से एक विशेष कार्य अधिकारी (OSD) नियुक्त किया जाएगा। उसे अस्पताल के HMIS सॉफ्टवेयर तक पहुंच होगी, जिससे मरीजों के उपचार, बेड की स्थिति और बिलिंग की निगरानी की जा सकेगी। मरीजों की शिकायतों के निवारण के लिए अस्पताल में अलग शिकायत निवारण कक्ष भी बनाया जाएगा, जहां शिकायतों पर 15 दिनों के भीतर निर्णय करने का प्रावधान है।
नियम तोड़ने पर दंड और अनुबंध समाप्त करने का प्रावधान
लीज रेंट के भुगतान में देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज वसूलने का प्रावधान है। सेवाएं निर्धारित समय पर शुरू नहीं होने पर किराये पर 25 प्रतिशत वार्षिक दंड लगाया जा सकेगा। यदि इन-पेशेंट (IPD) सेवाएं शुरू करने में 240 दिनों से अधिक की देरी होती है तो महानगरपालिका अनुबंध समाप्त कर अस्पताल को अपने नियंत्रण में ले सकेगी। BMC प्रशासन के मुताबिक यह योजना महाराष्ट्र सरकार की PPP नीति 2026 के अनुरूप तैयार की गई है। इसमें अस्पताल की संपत्ति महानगरपालिका के पास रखते हुए चिकित्सा उपकरणों, उनके रखरखाव और क्लिनिकल प्रबंधन से जुड़ी वित्तीय जिम्मेदारी निजी भागीदार को देने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि इस मॉडल के जरिए भगवती अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए 50 प्रतिशत बेड सुरक्षित रखे जाएंगे, जबकि अस्पताल के संचालन और उपकरणों पर महानगरपालिका का अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम किया जा सकेगा।

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