‘इंडिया केम 2026’ से भारत को वैश्विक रासायनिक हब बनाने का अवसर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
महाराष्ट्र नवंबर के पहले सप्ताह में लाएगा अलग रासायनिक उद्योग नीति, पालघर के वाढवण बंदर क्षेत्र में बड़े केमिकल इंडस्ट्रियल हब की तैयारी

मुंबई। ‘एडवांटेज्ड भारत: एन इमर्जिंग ग्लोबल केमिकल हब’ की संकल्पना पर आधारित ‘इंडिया केम 2026’ प्रदर्शनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति-निर्माताओं, निवेशकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को एक मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया है। उन्होंने कहा कि इससे नई साझेदारियों, निवेश अवसरों और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ेगी तथा देश को वैश्विक रासायनिक उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने का अवसर मिलेगा। गुरुवार को गोरेगांव स्थित नेस्को एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘इंडिया केम 2026’ का उद्घाटन केंद्रीय रसायन मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और देश-विदेश के निवेशक मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि कृषि, दवा निर्माण, वस्त्रोद्योग, वाहन निर्माण सहित अनेक क्षेत्रों के लिए रासायनिक उत्पाद आवश्यक हैं और इस उद्योग की प्रगति घरेलू उत्पादन तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जुड़ी हुई है। उनका संदेश केंद्रीय मंत्री नड्डा ने पढ़कर सुनाया। प्रधानमंत्री ने रासायनिक उद्यानों के विकास, अनुसंधान, विकास और नवाचार योजनाओं के साथ उन्नत रसायनों की बढ़ती मांग का उल्लेख करते हुए उद्योग जगत से आधुनिक तकनीक, उच्च मूल्यवर्धित उत्पाद, टिकाऊ उत्पादन पद्धतियों और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।
2047 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर की रासायनिक अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
केंद्रीय रसायन मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि भारत के रासायनिक उद्योग का वर्तमान बाजार करीब 220 अरब अमेरिकी डॉलर है। इसे वर्ष 2040 तक एक ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि रासायनिक औद्योगिक पार्कों के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत प्रत्येक पार्क को एक हजार करोड़ रुपये तक केंद्रीय सहायता देने का प्रावधान है, जबकि संबंधित राज्य से कम से कम 500 करोड़ रुपये खर्च करने की अपेक्षा है। उद्देश्य विश्वस्तरीय औद्योगिक पारिस्थितिकी, एकीकृत मूल्य शृंखला, लागत प्रतिस्पर्धा और टिकाऊ उत्पादन को बढ़ावा देना है।
नड्डा ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना में उन्नत रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को शामिल किया गया है। औद्योगिक सुरक्षा, खतरनाक रसायनों की सुरक्षित हैंडलिंग, आपात स्थिति से निपटने की तैयारी, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और प्लास्टिक रीसाइक्लिंग की सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
महाराष्ट्र नवंबर में घोषित करेगा अलग केमिकल पॉलिसी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि महाराष्ट्र सरकार रासायनिक उद्योगों में निवेश बढ़ाने के लिए स्वतंत्र नीति तैयार कर रही है, जिसे नवंबर के पहले सप्ताह में घोषित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पालघर जिले में वाढवण बंदर के आसपास एक बड़े रासायनिक औद्योगिक केंद्र को विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, महाराष्ट्र में लगभग 3,600 रासायनिक उद्योग कार्यरत हैं। देश के रासायनिक उद्योग के कुल सकल मूल्यवर्धन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत और रासायनिक उत्पादों के निर्यात में करीब 17 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि राज्य में पेट्रोकेमिकल, कृषि रसायन, विशेष रसायन, पॉलिमर और औद्योगिक रसायन निर्माण के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। निवेशकों के लिए मंजूरी प्रक्रिया सरल करने और एक ही स्थान पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘मैत्री’ सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म और ‘इन्वेस्ट महाराष्ट्र’ पहल के माध्यम से सेवाएं दी जा रही हैं। फडणवीस ने कहा कि वाढवण बंदर के विकास से रासायनिक उद्योगों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं और उद्योग समूहों को विकसित करने का बड़ा अवसर मिलेगा। उन्होंने दवा उद्योग के लिए आवश्यक सक्रिय औषधि घटकों (API) के घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और बल्क ड्रग पार्क के माध्यम से औद्योगिक पारिस्थितिकी विकसित करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि रासायनिक उद्योग से महाराष्ट्र में वर्तमान में करीब तीन लाख रोजगार उपलब्ध हैं और इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को दोगुना करने की क्षमता है।
मध्य प्रदेश और ओडिशा ने भी रखीं निवेश योजनाएं
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि बीना में करीब 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश से पेट्रोकेमिकल परियोजना विकसित की जा रही है। साथ ही प्लास्टिक पार्क और गैस आधारित उद्योगों के माध्यम से रोजगार तथा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की तैयारी है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि उनका राज्य खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से रसायन आधारित औद्योगिक अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक, ग्रीन हाइड्रोजन और उर्वरक क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र के विकास के लिए नीतिगत सहयोग, उद्योग सुगमता और औद्योगिक सुरक्षा पर जोर दे रही है। कार्यक्रम में यूपीएल उद्योग समूह के अध्यक्ष जय श्रॉफ, रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स के कार्यकारी निदेशक निखिल मेसवानी, फिक्की के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय शंकर, रसायन मंत्रालय के सचिव तेजवीर सिंह सहित उद्योग क्षेत्र के कई प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

