विजयादशमी पर योगी आदित्यनाथ का संदेश— ‘देश सुरक्षित तो धर्म सुरक्षित, समाज की एकता सबसे जरूरी’
गोरखनाथ मंदिर की विजय शोभायात्रा में बोले मुख्यमंत्री, सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता और भगवान श्रीराम के आदर्शों पर दिया जोर

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। विजयादशमी के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के तत्वावधान में आयोजित भव्य विजय शोभायात्रा कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने भारत की एकता, सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता और भगवान श्रीराम के आदर्शों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और समाज की एकता सर्वोपरि है। कोई व्यक्ति, समाज या जाति तब तक सुरक्षित नहीं हो सकती, जब तक भारत सुरक्षित नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा, “याद रखना होगा कि देश है तो धर्म है और धर्म है तो हम सब भी हैं। कोई व्यक्ति, समाज या जाति तब तक सुरक्षित नहीं है, जब तक भारत सुरक्षित नहीं है। इसी तरह जब तक सनातन सुरक्षित नहीं है, कोई सुरक्षित नहीं है।” योगी आदित्यनाथ ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी धार्मिक और वैचारिक संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ही ऐसा देश है, जहां सनातन परंपरा की छाया में विभिन्न जातियों, संप्रदायों, मतों और मजहबों को सुरक्षा और विकास के अवसर मिलते हैं। उन्होंने भारतीय ऋषि परंपरा के मंत्र ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की मूल भावना सबके कल्याण की रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में शिया-सुन्नी, ईसाई समुदायों और विभिन्न वैचारिक समूहों के बीच संघर्ष देखने को मिलते हैं। इसके विपरीत भारत अपनी विविधता के बावजूद एकता और सहअस्तित्व की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को कमजोर करने वाली ताकतें देश की सांस्कृतिक और धार्मिक उपलब्धियों को स्वीकार नहीं कर पातीं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और दीपोत्सव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों को लेकर भी दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने की कोशिश की जाती रही है।
योगी ने कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतों ने अयोध्या और रामभक्तों को लेकर पहले अलग रुख अपनाया था और अब वही लोग राम का नाम ले रहे हैं। उन्होंने रामायण के कालनेमि प्रसंग का उल्लेख करते हुए लोगों से सही और गलत की पहचान करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने विजयादशमी और रामलीला को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि रामलीला में कोई राम बनता है, कोई लक्ष्मण, कोई हनुमान, कोई निषादराज, कोई जटायु तो कोई रावण की भूमिका निभाता है। इसमें समाज के हर वर्ग की सहभागिता होती है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश देश की एकता को कमजोर करती है। योगी ने कहा कि जब भारत कमजोर होता है तो उसके धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था केंद्र भी कमजोर होते हैं तथा सामाजिक संरचना पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम की मर्यादा और आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों वर्ष बीत जाने के बाद भी उनके वचन, कर्म और जीवन मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए मर्यादा, धर्म, न्याय और समरसता का आदर्श स्थापित किया। योगी ने कहा कि इतिहास में अनेक सभ्यताएं और शक्तियां आईं और चली गईं, लेकिन भगवान श्रीराम की परंपरा और अयोध्या आज भी जीवंत है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के आदर्श आज भी मानवता को न्याय, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत को जोड़ने वाला उत्सव है। यह अच्छाई की बुराई पर विजय, सत्य की असत्य पर जीत और न्याय की अन्याय पर विजय का संदेश देता है। गोरखनाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार विजयादशमी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम में जय श्रीराम और हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच उत्साहपूर्ण वातावरण रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से सामाजिक एकता, धार्मिक सद्भाव और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत की शक्ति उसकी सनातन परंपरा, विविधता और सामाजिक समरसता में निहित है।
