भिवंडी में 11 एकड़ जमीन पर मलबे का अंबार, NGT ने ठाणे कलेक्टर पर लगाया एक लाख रुपये का जुर्माना
काशेली और दिवे-अंजुर में अवैध डंपिंग पर सख्त हुआ राष्ट्रीय हरित अधिकरण, जिला परिषद CEO को कचरे की मात्रा का आकलन कर हटाने की समयसीमा तय करने के निर्देश

ठाणे। भिवंडी के काशेली और दिवे-अंजुर गांवों में करीब 10 से 11 एकड़ क्षेत्र में निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरा फेंके जाने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकरण ने ठाणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को जमा मलबे की वास्तविक मात्रा का आकलन करने और उसे हटाने के लिए 16 दिसंबर तक समयसीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया है। वहीं, आदेशों का पालन नहीं करने और जवाब दाखिल नहीं करने पर ठाणे के जिला कलेक्टर पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एनजीटी के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। पीठ ने पाया कि संबंधित अधिकारियों ने कचरे की डंपिंग बंद होने का दावा तो किया, लेकिन पहले से जमा मलबे की मात्रा और उसे हटाने की कोई निश्चित समयसीमा प्रस्तुत नहीं की।
ठाणे कलेक्टर के रवैये पर एनजीटी की कड़ी टिप्पणी
पर्यावरण संगठन वनशक्ति और एक अन्य आवेदक की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने ठाणे जिला कलेक्टर के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया। पीठ ने टिप्पणी की कि दोनों गांवों पर अधिकार क्षेत्र होने के बावजूद जिला कलेक्टर ने अधिकरण के निर्देशों का पालन नहीं किया और न ही अपना जवाब प्रस्तुत किया। इस पर अधिकरण ने कलेक्टर पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह राशि एनजीटी बार एसोसिएशन (पश्चिमी क्षेत्र) को जमा कराने का निर्देश दिया गया है। साथ ही जिला कलेक्टर को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने और अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।जिला परिषद CEO को बनाया जाएगा पक्षकार
एनजीटी ने ठाणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है। अधिकरण ने निर्देश दिया कि संबंधित ग्राम पंचायतों को अवैध कचरा डंपिंग रोकने के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएं। साथ ही चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब प्रस्तुत किया जाए। जिला परिषद प्रशासन को जमा निर्माण मलबे की मात्रा का आकलन कर उसके निस्तारण की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
मैंग्रोव, आर्द्रभूमि और खाड़ी क्षेत्र पर खतरा
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, ठाणे जिले में कुल 12 स्थानों पर निर्माण एवं विध्वंस कचरा फेंके जाने का मामला सामने आया है।
इनमें से 10 स्थान ठाणे महानगरपालिका की सीमा में आते हैं, जबकि दो स्थान काशेली ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित हैं। याचिका में दावा किया गया है कि इस अवैध डंपिंग से तटीय विनियमन क्षेत्र CRZ-I(A) और CRZ-I(B), मैंग्रोव वनस्पति, आर्द्रभूमि तथा खाड़ी क्षेत्रों के पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा है। प्रभावित क्षेत्र खारीगांव-कलवा से मुंब्रा-दिवा होते हुए उल्हास मुहाने तक फैला बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इन स्थानों की विस्तृत जांच, पर्यावरणीय क्षति के आकलन, सुधारात्मक कार्रवाई और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग की है।
संयुक्त समिति करेगी स्थलों का निरीक्षण
इस मामले में एनजीटी ने 13 अगस्त को एक संयुक्त समिति का गठन किया था, जिसमें महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (MCZMA), जिला कलेक्टर कार्यालय और मैंग्रोव सेल के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति को याचिकाकर्ताओं को पूर्व सूचना देकर संबंधित स्थानों का निरीक्षण करने और अपनी रिपोर्ट अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।समिति को पर्यावरण की बहाली तथा भविष्य में निर्माण मलबे की अवैध डंपिंग रोकने के उपाय भी सुझाने हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भिवंडी के काशेली और दिवे-अंजुर में जमा हजारों वर्गमीटर क्षेत्र में फैले मलबे को हटाने के लिए प्रशासन कब तक ठोस कार्ययोजना लागू करता है। एनजीटी के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन, जिला परिषद और संबंधित ग्राम पंचायतों की जवाबदेही बढ़ गई है।
