दिव्यांगों को अवसर मिले तो वे बन सकते हैं समाज की ताकत: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने शनिवार को कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें उचित अवसर, प्रोत्साहन और सम्मान दिया जाए तो वे आत्मनिर्भर बनकर समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने व्यावसायिक संस्थाओं से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) फंड के माध्यम से दिव्यांगों से जुड़े उपक्रमों को सहयोग देने का आह्वान किया। राज्यपाल बोरीवली स्थित ओबेरॉय स्काईसिटी मॉल में शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक रूप से दिव्यांग वयस्कों द्वारा संचालित ‘मिट्टी कैफे’ के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह कैफे दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार, कौशल और आत्मविश्वास का मंच देने वाला सामाजिक समावेशन का प्रेरणादायी उदाहरण है। इस अवसर पर विधायक अतुल भातखलकर, पूर्व विधायक सुभाष पासी, वरिष्ठ पत्रकार कुमार राकेश, मिट्टी कैफे की संस्थापक अलिना आलम, स्काईसिटी मॉल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी तनु प्रसाद, ‘प्रोजेक्ट मुंबई’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिशिर जोशी और मिट्टी कैफे की निदेशक लता नायक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। राज्यपाल ने बताया कि मिट्टी कैफे के प्रतिष्ठान राष्ट्रपति भवन, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा मुंबई, बेंगलुरु और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र लोकभवन में भी इसी तरह का कैफे शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। राज्यपाल ने बौद्धिक दिव्यांगता वाले सदस्यों द्वारा तैयार केक काटा और कैफे में पहली ऑर्डर भी दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए केवल सहानुभूति पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक और ठोस प्रयास जरूरी हैं। व्यवसाय और सामाजिक जिम्मेदारी का समन्वय समय की मांग है और कंपनियों को केवल आर्थिक लाभ पर नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों और क्षमताओं पर भी ध्यान देना चाहिए। मिट्टी कैफे की संस्थापक अलिना आलम ने बताया कि दिव्यांग व्यक्तियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और सम्मानजनक जीवन देने के उद्देश्य से शुरू हुई यह पहल अब देशभर में करीब 80 स्थानों तक पहुंच चुकी है। उनके अनुसार, इन कैफे के माध्यम से अब तक दो करोड़ से अधिक कप कॉफी परोसी जा चुकी है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 80 लाख से अधिक भोजन की थालियां वितरित की गई हैं। कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग सदस्यों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और अपने अनुभव भी साझा किए।
