शिक्षा से केवल पढ़े-लिखे नहीं, अधिकार और कर्तव्य समझने वाले जिम्मेदार नागरिक तैयार हों : मुख्यमंत्री फडणवीस
बीएमसी की ‘स्मार्ट नागरिक’ शैक्षणिक पहल का शुभारंभ, मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने विद्यार्थियों से किया संवाद, जनवरी 2027 में होगी ‘विद्यार्थी प्रेरणा’ पुस्तक पर आधारित परीक्षा

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शिक्षित व्यक्ति तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसा नागरिक बनाना होना चाहिए, जो अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझे, समाज के प्रति संवेदनशील हो और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे। शिक्षा के माध्यम से समाज के प्रति समर्पित और नैतिक मूल्यों का पालन करने वाले नागरिक तैयार होंगे, तभी देश की प्रगति को वास्तविक गति मिलेगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री फडणवीस मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से शुरू की गई ‘सुजाण नागरिक-सक्षम भारत (स्मार्ट नागरिक)’ शैक्षणिक पहल के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। दादर पश्चिम स्थित मुंबई पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री फडणवीस और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने नागरिक शास्त्र एवं संवैधानिक मूल्यों पर आधारित ‘स्मार्ट नागरिक’ तथा भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन पर आधारित ‘विद्यार्थी प्रेरणा’ पुस्तिकाओं का विमोचन किया। इस अवसर पर मुंबई की महापौर रितू तावडे, उपमहापौर संजय घाडी, विधायक अमित साटम, महेश सावंत, कालिदास कोलंबकर, शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजश्री शिरवडकर, बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।संविधान के अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के विद्यार्थियों को विभिन्न संचार माध्यमों से दुनिया भर की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे एक जागरूक और प्रतिभाशाली पीढ़ी तैयार हो रही है, लेकिन विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा विकसित व्यवस्थाओं के कारण ही व्यक्ति को शिक्षा और अपने व्यक्तित्व के विकास के अवसर मिलते हैं। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को यह समझना चाहिए कि समाज के प्रति उसकी भी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा देश को दिया गया संविधान भारत की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि उसके सिद्धांतों को जीवन में उतारना आवश्यक है। न्याय, समानता और समान अवसर जैसे संवैधानिक मूल्य विविध भाषाओं, जातियों, धर्मों और संस्कृतियों वाले भारत को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को संविधान से प्राप्त अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों की भी जानकारी होनी चाहिए। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और न्याय प्राप्त करने के लिए संवैधानिक मार्ग अपनाना आवश्यक है।
छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य से प्रेरणा लेने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न जातियों और समुदायों को एकजुट किया था। उनके कार्यों में एकता, निर्भयता और समाज के प्रति संवेदनशीलता जैसे मूल्य दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य के आदर्शों और भारतीय संविधान के सिद्धांतों को समझना चाहिए। ‘स्मार्ट नागरिक’ और ‘विद्यार्थी प्रेरणा’ जैसी पहल विद्यार्थियों में संवैधानिक समझ, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होंगी। मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई के न्यायिक योगदान की सराहना करते हुए कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया।
बचपन से ही विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्य विकसित हों: भूषण गवई
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने कहा कि भारतीय संविधान ने देश की एकता और अखंडता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संविधान की प्रस्तावना में शामिल न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के मूल्यों को बच्चों के मन में कम उम्र से ही विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के साथ दूसरों की स्वतंत्रता और अधिकारों का भी सम्मान करना चाहिए। सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों का पालन जिम्मेदार नागरिक बनने के महत्वपूर्ण पहलू हैं। गवई ने छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने बीएमसी की ओर से 50 मेधावी विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों के अध्ययन के लिए सिंगापुर भेजने की योजना की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसरों से वंचित नहीं रहना चाहिए।
