
नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए तथा पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस मामले में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदारी तय करते हुए उच्च पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। आराधना मिश्रा ने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने राम मंदिर में चंदे की कथित चोरी से समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचने की बात कही थी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि केवल दुख व्यक्त करने से जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती और मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारी विभिन्न संगठनों से जुड़े रहे हैं, तो उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि संबंधित लोगों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े मामलों में करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं के बावजूद केंद्रीय जांच एजेंसियों की कोई सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए कर्मचारी ट्रस्ट में कार्यरत निचले स्तर के कर्मचारी हैं, जबकि कथित रूप से निर्णय लेने वाले उच्च पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने भी राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताएं हुई हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से इस पूरे मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।



