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शांति सोनी के मार्गदर्शन में नशा मुक्ति, जल संरक्षण और मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता अभियानों को गाँव-गाँव तक पहुँचा रहीं समर्पित शिक्षिका

सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है, जब शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर जन-जागरण का माध्यम बने। इसी उद्देश्य को साकार करने में वरिष्ठ व्याख्याता एवं जन-जागरूकता अभियानों की संचालिका शांति सोनी के नेतृत्व में अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएँ सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इनमें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कुरदा की व्याख्याता ज्योति सराफ का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने विभिन्न सामाजिक अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं ग्रामीण समुदाय में जागरूकता की नई चेतना जगाई है। शांति सोनी द्वारा संचालित “नशा छोड़ो–जीवन जोड़ो”, “जल संचयन–जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण” तथा “मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन एवं जागरूकता” जैसे जनहितकारी अभियानों को जन-जन तक पहुँचाने में ज्योति सराफ ने प्रेरक सहयोगी के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने विद्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंवाद, प्रेरक गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इन अभियानों को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने का कार्य किया।
नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत उन्होंने युवाओं को व्यसन के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया। हस्ताक्षर अभियान, जागरूकता रैलियों तथा संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में नशामुक्ति का प्रभावी संदेश प्रसारित किया गया। जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान के अंतर्गत ज्योति सराफ ने वर्षा जल संचयन, जल की प्रत्येक बूंद के महत्व, वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश विद्यार्थियों और ग्रामीणों तक पहुँचाया। उनके प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन जैसे संवेदनशील विषय पर भी उन्होंने सामाजिक संकोच को दूर करते हुए किशोरियों एवं महिलाओं को वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्यपरक जानकारी प्रदान की। उनके मार्गदर्शन से अनेक बालिकाओं में स्वच्छता, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है। इन अभियानों की सफलता में जहाँ शांति सोनी का दूरदर्शी नेतृत्व, सतत मार्गदर्शन और समाजहित की भावना महत्वपूर्ण रही है, वहीं ज्योति सराफ जैसी समर्पित शिक्षिकाओं का अथक परिश्रम इन प्रयासों को धरातल पर सफल बनाने का आधार बना है। दोनों शिक्षिकाओं की यह सहभागिता इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि जब शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसेवा का समन्वय होता है, तब समाज में स्थायी एवं सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। आज यह जन-जागरण अभियान विद्यालयों की सीमाओं से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का व्यापक आंदोलन बन चुका है। शांति सोनी के प्रेरक नेतृत्व और ज्योति सराफ के समर्पित सहयोग से यह अभियान जनभागीदारी, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभर रहा है।

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