भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पहुंचा, 2029 तक 50 हजार करोड़ का लक्ष्य: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री ने SIDM के वार्षिक सत्र में दिए 15 चैंपियन पुरस्कार, रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का आह्वान

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत रक्षा उपकरणों के बड़े आयातक देश से आधुनिक सैन्य उपकरणों के विश्वसनीय निर्यातक के रूप में उभर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा मंत्री 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के आठवें वार्षिक सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभिन्न संगठनों को SIDM चैंपियन पुरस्कार 2026 प्रदान किए। कार्यक्रम में कुल 15 पुरस्कार दिए गए। इन पुरस्कारों के माध्यम से स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास, उत्पाद नवाचार, डिजाइन, आयात के विकल्प तैयार करने, विनिर्माण में उत्कृष्ट प्रदर्शन और रक्षा निर्यात के क्षेत्र में संगठनों की उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। राजनाथ सिंह ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए स्वदेशी उद्योगों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीक जरूरी
इस वर्ष के वार्षिक सत्र की विषयवस्तु ‘संप्रभु क्षमताएं, विवादित सीमाएं: उथल-पुथल के दौर में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देना’ थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि कोई देश अपनी रक्षा सेनाओं के लिए आवश्यक तकनीक और उपकरणों का डिजाइन, विकास तथा निर्माण स्वयं किस हद तक कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभाशाली मानव संसाधन, युवा कार्यबल, मजबूत औद्योगिक क्षमताएं और अनुकूल नीतिगत समर्थन उपलब्ध है। इन क्षमताओं के बल पर भारत दुनिया के प्रमुख रक्षा विनिर्माण देशों में स्थान बना सकता है।
रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत करने पर जोर
राजनाथ सिंह ने देश के कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निजी क्षेत्र की मौजूदा लगभग 24 प्रतिशत हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का अपना पूर्व आह्वान दोहराया।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों का योगदान उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। अब रक्षा उद्योग को अनुसंधान, तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।
रक्षा मंत्री ने उद्योग जगत को आश्वस्त किया कि सरकार नियमन, सुरक्षा, गुणवत्ता और जवाबदेही के आवश्यक मानकों को बनाए रखते हुए रक्षा कंपनियों के विकास में निरंतर सहयोग करती रहेगी।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और नई तकनीकों की बढ़ती भूमिका
युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक सैन्य अभियानों में ड्रोन, मिसाइल, वायु रक्षा प्रणालियों तथा तेजी से विकसित हो रही सॉफ्टवेयर और संचार तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने रक्षा उपकरण निर्माताओं से अनुसंधान एवं विकास पर होने वाले खर्च को केवल व्यय नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण निवेश के रूप में देखने का आग्रह किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि नई तकनीकों में निवेश से सैन्य तैयारियों को मजबूत करने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख, उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत बताई
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी आपात आवश्यकता या सैन्य अभियान के दौरान घरेलू रक्षा उत्पादन इकाइयों की क्षमता को तेजी से बढ़ाने की व्यवस्था होना आवश्यक है।
उन्होंने रक्षा उद्योग से विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने और बदलती सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप कम समय में प्रभावी समाधान विकसित करने का आह्वान किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश की रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत करने के लिए केवल रक्षा उपकरणों का निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आवश्यक तकनीकों, डिजाइन और उत्पादन प्रक्रियाओं पर भी देश का नियंत्रण होना चाहिए।
रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई और स्टार्टअप को बढ़ावा
रक्षा मंत्री ने घरेलू रक्षा औद्योगिक तंत्र को मजबूत बनाने में SIDM की भूमिका की सराहना की। वर्ष 2017 में स्थापित यह संगठन बड़ी रक्षा कंपनियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), स्टार्टअप, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों तथा विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने निजी रक्षा उद्योग की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई नीतिगत सुधार लागू किए हैं। इनमें रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, रक्षा खरीद नियमावली, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां, सृजन पोर्टल और रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास को प्रोत्साहित करना, आयात पर निर्भरता कम करना और भारतीय रक्षा कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार और रक्षा उद्योग के बीच निरंतर संवाद, अनुसंधान में निवेश तथा उत्पादन क्षमता का विस्तार भारत को रक्षा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबारासु, SIDM के संस्थापक अध्यक्ष बाबा कल्याणी, अध्यक्ष अरुण रामचंद्रनी, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सशस्त्र बलों के प्रतिनिधि तथा भारतीय और अंतरराष्ट्रीय रक्षा कंपनियों के प्रमुख उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *