विश्व बेघर दिवस: मुंबई में बेघरों के अधिकारों की आवाज बुलंद, अलग राज्यस्तरीय नीति बनाने की जोरदार मांग

मुंबई। विश्व बेघर दिवस के अवसर पर ताड़देव स्थित बॉडीगार्ड लेन में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में प्रसिद्ध सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिल गलगली उपस्थित रहे। इस अवसर पर बेघर नागरिकों की समस्याओं, आश्रय केंद्रों, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम स्वनिधि योजना तथा बेघरों के पुनर्वास के लिए अलग राज्यस्तरीय नीति बनाने की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य आश्रय निगरानी समिति के अध्यक्ष उज्ज्वल उके और अनिल गलगली द्वारा बेघर नागरिकों के हित में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। अनिल गलगली ने पहचान फाउंडेशन के संस्थापक बृजेश आर्य और उनकी टीम के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्था लंबे समय से बेघर नागरिकों के उत्थान, पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए लगातार काम कर रही है। झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) और पक्के मकानों से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए वे हर संभव सहयोग करेंगे। उन्होंने मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा संचालित आश्रय केंद्रों की जानकारी भी दी। गलगली ने कहा कि बेघर नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए स्थायी आवास मिलना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ इस विषय पर लगातार प्रयास और अनुवर्ती कार्रवाई की जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना और SRA के माध्यम से अगले दो से तीन वर्षों में आवास के प्रश्न पर सकारात्मक प्रगति होने की उम्मीद जताते हुए उन्होंने सभी से पहचान फाउंडेशन के साथ मिलकर काम करने की अपील की। पहचान फाउंडेशन के संस्थापक बृजेश आर्य ने बेघर नागरिकों के लिए अलग राज्यस्तरीय नीति बनाने की जोरदार मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक बेघर लोगों के पुनर्वास के लिए स्पष्ट और प्रभावी नीति नहीं बनेगी, तब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान मुश्किल है। ऐसी नीति से बेघर नागरिकों को आवास, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद मिलेगी। आर्य ने बताया कि पहचान फाउंडेशन की टीम मतदान अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के साथ मिलकर मुंबई के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भारतीय निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision—SIR) में सहयोग कर रही है। संस्था का प्रयास है कि किसी भी पात्र भारतीय बेघर नागरिक का नाम मतदाता सूची से न छूटे। इसके लिए जनजागरण और लगातार अनुवर्ती कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने ‘माय मुंबई फोटोग्राफी प्रोजेक्ट 2027’ के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान बेघर महिलाओं ने भी बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं, अनुभव और विचार खुलकर साझा किए। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बेघर नागरिकों को केवल अस्थायी आश्रय ही नहीं, बल्कि स्थायी घर, सामाजिक सम्मान और सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलना चाहिए। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन पहचान फाउंडेशन के सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष रोकड़े ने किया। इस अवसर पर पहचान संस्था के सदस्य समीर वायकर, राज सिंह (SIP), बेला खरवा, कोकी, अनिता खरवा, सोनी वातन, कारी, यास्मीन, मंजू बुटिया, अनिता सहित अनेक बेघर नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
