‘हर बच्चे को परिवार का अधिकार’ : मंत्री आदिती तटकरे

फोस्टर केयर, गोद लेने और आफ्टर केयर व्यवस्था होगी मजबूत एक प्रतिशत आरक्षण से 1,060 अनाथ युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
मुंबई। असुरक्षित बच्चों को संस्थागत देखभाल में रखने के बजाय परिवार और समुदाय आधारित विकल्प उपलब्ध कराने पर महाराष्ट्र सरकार विशेष जोर दे रही है। ‘हर बच्चे को परिवार का अधिकार है’ के सिद्धांत के तहत राज्य में बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि फोस्टर केयर, गोद लेने की प्रक्रिया और आफ्टर केयर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) पोर्टल और मिशन वात्सल्य के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हुए तटकरे ने राज्य में बाल संरक्षण के लिए लागू विभिन्न योजनाओं और पहलों की जानकारी दी। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के महिला एवं बाल विकास मंत्री भी शामिल हुए। तटकरे ने बताया कि महाराष्ट्र में असुरक्षित बच्चों की सुरक्षा के लिए पालक देखभाल (फोस्टर केयर), दत्तक ग्रहण और पश्चात देखभाल (आफ्टर केयर) को मजबूत किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि जहां संभव हो, बच्चों को संस्थानों के बजाय परिवार या समुदाय आधारित सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
1% आरक्षण से 1,060 अनाथ युवाओं को सरकारी नौकरी
महाराष्ट्र में अनाथ बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में लागू एक प्रतिशत समांतर आरक्षण से सितंबर 2026 तक कुल 1,060 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। इनमें वर्ग-1 के 4, वर्ग-2 के 68, वर्ग-3 के 974 और वर्ग-4 के 14 उम्मीदवार शामिल हैं।
राज्य सरकार सितंबर 2026 तक लगभग 12,443 अनाथ प्रमाणपत्र भी जारी कर चुकी है। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर पात्र बच्चों और युवाओं को शिक्षा, रोजगार तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
उच्च और तकनीकी शिक्षा का खर्च उठाएगी सरकार
तटकरे ने बताया कि अनाथ बच्चों की उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा परीक्षा शुल्क का पूरा खर्च राज्य सरकार उठा रही है। इस संबंध में 17 जुलाई 2025 को लिए गए निर्णय का अब तक 99 से अधिक विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इसके अलावा क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले बाल संगोपन योजना के तहत राज्य के करीब दो लाख बच्चों को प्रतिमाह 2,250 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि बाल संरक्षण केवल बच्चों को आश्रय उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए। बच्चों को सुरक्षित पारिवारिक वातावरण, शिक्षा, आर्थिक सहायता और आगे चलकर आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने CARA पोर्टल और मिशन वात्सल्य के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रत्येक बच्चे के मामले की नियमित निगरानी और प्रभावी फॉलोअप पर जोर दिया, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर सही देखभाल और पुनर्वास का अवसर मिल सके।
